फीस बढ़ाने के विरोध में हर्रावाला स्थित आर्युवेद कॉलेज परिसर में धरना प्रदर्शन करते छात्र-छात्र
आयुर्वेदिक कोर्सेज में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ स्टूडेंट्स का गुस्सा बढ़ गया है। बृहस्पतिवार को आयुर्वेद यूनिवर्सिटी से लेकर उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज तक छात्रों ने जोरदार आंदोलन किया। साथ ही विवि और सरकार से फीस के मामले पर सख्त फैसला लेने की मांग की। दूसरी ओर, कॉलेजों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है एक साल से विवाद की वजह से फीस नहीं आ रही है। ऐसे में वह कॉलेज कैसे चलाएं?
आयुर्वेद विवि और इससे संबद्ध कॉलेजों में फीस का मुद्दा गरमाता जा रहा है। तीन साल पहले जो फीस बढ़ाई गई थी। मामला कोर्ट में चला गया। इस वजह से एक ओर जहां कॉलेजों की ओर से बढ़ी फीस मांगी जा रही है तो दूसरी ओर स्टूडेंट्स हाईकोर्ट के आदेश के तहत इसका विरोध कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को स्टूडेंट्स ने आयुर्वेद विवि में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज में भी छात्रों ने तीन लाख रुपये फीस मांगने पर गेट पर तालाबंदी कर धरना दिया। साथ ही चेतावनी दी यदि सरकार या यूनिवर्सिटी ने जल्द कोई फैसला नहीं लिया तो आंदोलन उग्र कर देंगे।
तीन वर्षों के शुल्क का मामला अटका
शासन द्वारा बढ़ाया गया शुल्क कॉलेजों ने ले भी लिया था। बाद में हाईकोर्ट ने बढ़ी फीस के आदेश को रद्द कर दिया था। इसी वजह से मामला लटक गया था। कॉलेजों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की है लेकिन फैसला नहीं आया है। वर्ष 2018 के बाद की फीस तो तय हो गई लेकिन इससे पहले तीन साल की फीस का मामला लटका हुआ है।
पहले आश्वासन दिया, फिर पत्र भेजा
स्टूडेंट्स का कहना है कि दो दिन पहले जब आंदोलन किया तो कुलपति ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था। अब उन्होंने कॉलेजों को अपील करता हुआ पत्र भेजा है। इससे स्टूडेंट्स में आक्रोश बढ़ गया है। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी को कार्रवाई करनी चाहिए।
बिना फीस कैसे कॉलेज चलेगा? पिछले साल जुलाई से फीस नहीं आई है। हम रेगुलर खर्च वहन नहीं कर पा रहे हैं। अगले महीने वेतन देने की स्थिति में नहीं हैं। अब मजबूरन संस्थान बंद कर चाबी मंत्री को सौंप देंगे।
-डॉ. अश्वनी कांबोज, चेयरमैन, उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज