....तो गलोगी की पहाङी का नही होगा ट्रीटमेंट, लोक निर्माण विभाग कर रहा पहाङी के ढाल को कम होने का इंतज?
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मसूरी-दून मार्ग पर गलोगी की पहाड़ी से गिरने वाले मलबे, पत्थरों और बोल्डरों से निजात मिलने के आसार हैं। बीते एक माह में पांच दर्जन से अधिक बार गलोगी के पास मलबा और पत्थर आने से यातायात प्रभावित हो चुका है। इसके बावजूद लोक निर्माण विभाग पहाड़ी के ट्रीटमेंट के लिए कोई प्लान नहीं बना पाया है। बताया जा रहा है कि लोनिवि पहाड़ की ढाल कम होने का इंतजार कर रहा है।
मसूरी-दून मार्ग गलोगी के पास खतरनाक बन चुकी पहाड़ी शहर के लिए नासूर बन चुकी है। लगातार सड़क पर मलबा, पत्थर आने से मसूरी और देहरादून जाने वाले लोग परेशान हैं। साथ ही मसूरी आने वाले पर्यटक भी घंटों फंसे रहते हैं। सोमवार को भी गलोगी के पास पहाड़ गिरने से आधे घंटे तक यातायात ठप रहा। इस दौरान सड़क के दोनों ओर दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया। बंगलूरू के पर्यटक किरन ने कहा कि आधे घंटे से अधिक समय से जाम में फंसे हैं। सैर सपाटे का मजा किरकिरा हो रहा है। हैदराबाद से आए सैलानी अजहर ने कहा कि एक घंटे से जाम में फंसे हैं। सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें हैं। वाहनों में बैठक बच्चे और महिलाओं परेशान हो रही हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता डीसी नौटियाल ने बताया कि गलोगी में जिस जगह भूस्खलन हो रहा है उस स्थान का जियोलॉजिस्ट से निरीक्षण कराया गया था। जियोलॉजिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार इस पहाड़ी का ट्रीटमेंट फिलहाल संभव नहीं है। पहाड़ी की ढाल सीधा होने के कारण उस पर प्रोटेक्शन वॉल ज्यादा दिन नहीं टिकेगी। इसलिए जब तक पहाड़ी का ढलान कम नहीं होगा तब तक ट्रीटमेंट करना संभव नहीं है। फिलहाल गलोगी में जेसीबी तैनात है। सड़क पर मलबा हटाने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।