दो दिन मौसम साफ रहने के बाद मंगलवार दोपहर को केदारनाथ धाम में दोपहर बाद फिर बर्फबारी शुरू हो गई। इसमें धाम में पुनर्निर्माण कार्य फिर प्रभावित हो गए हैं। धाम में दो फीट बर्फ जमा हो गई।
एनआईएम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी की टीम द्वारा बेस कैंप से केदारनाथ मंदिर तक बनाए गए अस्थायी मार्ग पर फिर बर्फ जमा हो गई है।
इससे यहां से आवाजाही करना मुश्किल हो गया है। कड़ाके की ठंड पड़ने से पुनर्निर्माण कार्य में जुटे लोगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। मजदूर और अधिकारी बर्फ पिघलाकर पानी की व्यवस्था कर रहे हैं।
मंगलवार को भी मंदिर समिति की टीम ने मंदिर प्रांगण से बर्फ हटाने का काम किया, लेकिन दोपहर बाद फिर बर्फ जमा हो गई।
मंदिर समिति के सीओ (मुख्य कार्याधिकारी) बीडी सिंह ने बताया कि पिछले डेढ़ दशक में केदारनाथ में इतनी बर्फ कभी नहीं गिरी है, जितनी कि इस वर्ष।
बर्फ साफ करने के लिए 42 कर्मचारी लगाए गए हैं। केदारनाथ चौकी इंचार्ज विपिन पाठक ने बताया कि पुलिस ने हेलीपैड तक बेस कैंप से अस्थायी रास्ता बनाया था लेकिन फिर बर्फ जम गई है।
25 सदस्यीय टीम पहुंची केदारनाथ
नगर पंचायत केदारनाथ की 25 सदस्यीय टीम भी केदारनाथ धाम पहुंच गई है।
नगर पंचायत के प्रभारी अधिशासी अधिकारी मोहन प्रसाद गौड़ ने बताया कि टीम में सफाई कर्मी हैं, जो केदारनाथ मंदिर पहुंच कर मार्ग से बर्फ की सफाई करेंगे।
केदारनाथ धाम में मंगलवार से बीएसएनएल की फोन सेवा बहाल हो गई है। बीएसएनएल के महाप्रबंधक एमपी गुप्ता ने बताया कि अब केदारनाथ में तीर्थयात्रियों को बेहतर फोन सेवा उपलब्ध होगी।
सोनप्रयाग पहुंची एसडीआरएफ की टीम
गत वर्ष जून माह में आई आपदा से सबक लेते हुए इस बार सरकार ने यात्रा शुरू होने से पहले ही स्टेट डिजास्टर रिलीफ फोर्स को केदारघाटी में भेज दिया है।
मंगलवार को एसडीआरएफ की 90 सदस्यीय टीम सोनप्रयाग पहुंच गई है। बुधवार को टीम सोनप्रयाग से आगे की रेकी करेगी।
गत वर्ष जून में केदारनाथ जलप्रलय से भारी जन-धन की हानि हुई थी।
उचित रेस्क्यू न होने के कारण धाम में फंसे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। इसी को देखते हुए इस वर्ष सरकार ने एनडीआरएफ की तर्ज पर एसडीआरएफ का गठन किया है।
जो राज्य में आपदा की स्थिति में रेस्क्यू कार्य करेगी। केदारनाथ यात्रा से पूर्व एसडीआरएफ की टीम को केदारघाटी भेज दिया गया है। जिससे वह यात्रा से पूर्व अपने अनुकूल व्यवस्थाएं जुटा सके।
पुलिस अधीक्षक बीजे सिंह ने बताया कि एसडीआरएफ की 90 सदस्यीय दो टीम सोनप्रयाग पहुंच गई है। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक टीम चार टुकड़ियों में बंटकर विभिन्न पड़ावों पर तैनात रहेगी।
पैदल रास्ते का निर्माण करने में जुटे जवान
बदरीनाथ धाम में मंदिर समिति के मजदूर मंदिर परिसर में रंग-रोगन कार्य में लगे हुए हैं। हेमकुंड साहिब पैदल मार्ग पर अटलाकोटी से आगे सिक्ख रेजीमेंट के 40 जवान हिमखंड काटकर पैदल रास्ते का निर्माण करने में जुटे हुए हैं।
यहां पैदल रास्ते पर 5 से 9 फुट बर्फ जमी हुई है। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह का कहना है कि मौसम साफ रहा तो 20 मई तक हेमकुंड साहिब में यात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी।
बीआरओ के कमान अधिकारी मेजर राहुल श्रीवास्तव का कहना है कि हिमखंड हाईवे पर आने से दिक्कतें आ रही हैं। देर रात तक हाईवे को साफ कर लिया जाएगा।
नहीं खुला बदरीनाथ हाईवे
बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग दूसरे दिन मंगलवार को भी दूधगंगा में अवरुद्ध रहा।
यहां चटख धूप में हिमखंड पिघल कर हाईवे पर आ रहे हैं जिससे बीआरओ के मजदूरों को कार्य करने में भारी दिक्कत उठानी पड़ रही है।
हाईवे नहीं खुलने से बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की द्वितीय टीम ने धाम तक साढ़े आठ किमी की दूरी पैदल ही तय की।
बीआरओ ने कंचनगंगा और पागल नाला में हाईवे को हिमखंड से मुक्त कर लिया है, लेकिन दूध गंगा में चट्टान से रह-रहकर हिमखंड हाईवे पर आ रहे हैं। इससे वाहनों की आवाजाही पूर्ण रूप से बंद है।