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उत्तराखंड में बर्फबारी, पारा माइनस दो डिग्री लुढ़का

Sun, 26 Oct 2014 08:44 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून/हल्द्वानी
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पश्चिमी विक्षोभ ने उत्तराखंड के मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल डाला। गढ़वाल और कुमाऊं की ऊंची पहाड़ियों पर बर्फबारी हुई है।
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बारिश और ओलावृष्टि से मैदानों में भी ठंड बढ़ गई है। शनिवार को बदरीनाथ धाम में बर्फ गिरी और पारा माइनस दो डिग्री तक लुढ़क गया। राज्य में जाड़े ने अपने पैर जमा लिए हैं।

मौसम विभाग के निदेशक डॉ. आनंद शर्मा ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ का असर अगले 24 घंटे तक बना रहेगा।

शनिवार की शाम से गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब सहित ऊंचे पहाड़ों पर ठीकठाक बर्फबारी हुई। मसूरी में ओले पड़े तो राजधानी देहरादून समेत कई जिलों में बारिश और बूंदाबांदी हुई।
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बदरीनाथ धाम में दो इंच तक बर्फबारी

तीन धामों के कपाट बंद हो चुके हैं। सिर्फ बदरीनाथ धाम के कपाट खुले हैं। बदरीनाथ धाम में शाम पांच बजे के करीब बर्फबारी शुरू हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार धाम में लगभग दो इंच बर्फबारी हो चुकी थी।

एकाएक ठंड बढ़ने से बदरीनाथ आने वाले श्रद्धालुओं को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। कुमाऊं में पिथौरागढ़ के धारचूला में भारी बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया।

अगले कुछ दिन ऊंची पहाड़ियों पर बर्फबारी के आसार
पश्चिमी विक्षोभ का असर उत्तराखंड पर शनिवार को देखने को मिला। राज्य आपातकालीन केंद्र की सूचना के मुताबिक अगले कुछ दिन बदरीनाथ, पिथौरागढ़, हेमकुंड साहिब, यमुनोत्री सहित ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक 28 अक्टूबर के बाद विक्षोभ के कारण पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में मौसम फिर से करवट बदल सकता है। केदारनाथ से मिली सूचना के मुताबिक शनिवार को चौराबाड़ी से ऊपर के इलाकों में बर्फ पड़ी।

मौसम लगातार करवट बदलता रहा। राज्य मौसम केंद्र ने हालांकि कोई चेतावनी जारी नहीं की है।  भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक 28 अक्टूबर से नया पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्र के मौसम को प्रभावित करेगा।

शीतकालीन यात्रा को मार न जाए पाला

मुख्यमंत्री हरीश रावत के आदेश पर शीतकालीन चारधाम यात्रा की तैयारियां तो शुरू हो गई हैं, लेकिन यात्रा की राह आसान नहीं रहने वाली है। सर्दियों में पहाड़ की सड़कों पर पड़ने वाला पाला यात्रा पर भी पड़ सकता है।

वजह यह कि पाला पड़ने से सड़कों पर वाहन चलाना आसान नहीं होता है। फिसलन की वजह से अक्सर हादसे हो जाते हैं। हालांकि, परिवहन मुख्यालय ने शीतकालीन चारधाम यात्रा के लिए सर्वे की जिम्मेदारी चार संभागीय परिवहन अधिकारियों को सौंपी है।

दरअसल, धूप के लिहाज से पहाड़ की दो दिशाएं होती हैं। पहाड़ के जिस हिस्से में धूप आती है उसे लीवर्ड साइड कहा जाता है, जबकि दूसरे हिस्से को विंड वर्ड साइड। सर्दियों में जिस हिस्से में धूप नहीं आती वहां पर पाला खतरनाक हो जाता है।

इसी कारण स्थानीय लोग भी इन रूटों से आवाजाही नहीं करते हैं। इनके स्थान पर वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में बाहर से आने वाले वाहनों के लिए यह राह आसान नहीं रहने वाली है।

शीतकाल में चारधाम यात्रा जोशीमठ (बदरीनाथ), मुखबा (गंगोत्री), ऊखीमठ (केदारनाथ) और खरसाली (यमुनोत्री) के लिए चलेगी। लेकिन दिसंबर, जनवरी और फरवरी माह में बर्फबारी और पाले की वजह से यात्रियों का यहां तक पहुंचना जोखिम भरा होगा।
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पहाड़ पर आज बर्फबारी के आसार

दिवाली के साथ सर्दी के मौसम ने दस्तक दे दी है। शनिवार को दिनभर भर बादल और शाम को झमाझम बारिश के बाद पारे में 2.2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। रविवार को पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के आसार हैं, जिससे ठंडक बढ़ सकती है।

शुक्रवार को भी दिनभर बादल छाए रहे और शाम को दून 14.2 मिमि बारिश रिकॉर्ड की गई। शनिवार को भी मौसम का यही रुख रहा। शाम को घंटाघर, ईसी रोड, कौलागढ़ रोड, रायपुर सहित कई क्षेत्रों में झमाझम बारिश हुई।

इस वजह से पारे में गिरावट आई और शाम को लोग स्वेटर पहनकर बाहर निकले। शुक्रवार को शाम छह बजे पारा 23.2 डिग्री सेल्सियस था, जो शनिवार को 21.2 डिग्री रहा।

मौसम विभाग के मुताबिक रविवार को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है। जबकि राजधानी दून में भी आंशिक बादल छाए रहेंगे और कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश हो सकती है।
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