मंगलवार को जिला मुख्यालय से पार्क के उपनिदेशक नंदावल्लभ शर्मा, वन क्षेत्राधिकारी प्रताप पंवार तथा पशु चिकित्सक डा.शिवानंद पाठक एवं डॉ. विनोद सोनी हिम तेंदुए के उपचार के लिए नेलांग पहुंचे। लेकिन मंगलवार सुबह छह बजे ही उसकी मौत हो गई।
पशु चिकित्सकों के पैनल की मौजूदगी में हिम तेंदुए का पोस्टमार्टम कर उसके शव का जलाकर नष्ट कर दिया गया। जबकि मौत के कारणों की पड़ताल के लिए उसके बिसरा आदि के नमूने एकत्र कर जांच के लिए बरेली स्थित वाईल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट की लैब में भेजे गए हैं।
बता दें कि इससे पहले वर्ष 2015 और 2018 में भी पार्क क्षेत्र में दो हिम तेंदुओं की मौत हो चुकी है। हिम तेंदुओं के संरक्षण के लिए भारी भरकम योजनाएं संचालित करने के बावजूद छह सालों के भीतर तीन हिम तेंदुओं की मौत चिंता का विषय बनी हुई है।
वन क्षेत्राधिकारी प्रताप पंवार ने बताया कि मंगलवार को मृत हिम तेंदुआ मादा थी और इसकी उम्र सात-आठ साल थी। उसके मल के रास्ते रक्तस्राव हो रहा था। संभवत: बीमार होने के कारण वह शिकार करने में असमर्थ थी और इसकी कारण उसकी मौत हुई।
गंगोत्री नेशनल पार्क में बीते कुछ सालों में हिम तेंदुओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। कैमरा ट्रैप से की गई पड़ताल के अनुसार वर्तमान में पार्क क्षेत्र में करीब 30-35 हिम तेंदुए मौजूद हैं। पार्क क्षेत्र में हिम तेंदुओं की मौत सामान्य बीमारी के कारण हुई है। विस्तृत पड़ताल के लिए मृत हिम तेंदुए का बिसरा आदि नमूने जांच के लिए लैब भेजे जा रहे हैं।
-नंदा वल्लभ शर्मा, उपनिदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क उत्तरकाशी।