शंकराचार्य ने पीने के लिए पानी मांगा, तो कन्या ने कहा कि स्वयं ले लो। इस पर शंकराचार्य ने कहा कि मुझमें इतनी शक्ति नहीं है कि मैं उठकर पानी पी लूं। जवाब में यह कह कर कि आप तो शक्ति में विश्वास नहीं करते हो, कन्याअंतर्ध्यान हो गई।
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शंकराचार्य समझ गए कि माता दुर्गा (शक्ति) उनकी परीक्षा ले रही थी। उन्होंने देवी से क्षमा मांगी। इसके बाद वह ठीक हो गए। बाद में उन्होंने माता शक्ति की प्रार्थना करते हुए देवी अपराध क्षमापना स्त्रोतम की रचना की।
शंकराचार्य श्रीनगर में हैजा से पीड़ित हो गए थे
गढ़वाल के इतिहास के जानकार कमल रावत बताते हैं कि यह भी मान्यता है कि शक्ति को मिथ्या मानने वाले शंकराचार्य श्रीनगर में हैजा से पीड़ित हो गए थे। तब उन्हें बियाबान स्थान (वर्तमान धोबीघाट) में एक कन्या ने रोजाना छाछ पिलाकर स्वस्थ कर दिया। शंकराचार्य को अहसास हुआ है कि शक्ति के बिना शरीर कुछ नहीं है। इसके बाद उन्होंने लगभग तीन माह तक रुक कर देवी से क्षमा याचना करते हुए एक-एक करके स्त्रोत लिखे।