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नेपाल में हिंदूकुश की पहाड़ियों पर रहने वाली जनजातियों को आजीविका के गुर सिखाएंगे आईसीएफआरई के वैज्ञानिक

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नेपाल में हिंदूकुश की पहाड़ियों पर रहने वाली जनजातियों को भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) के वैज्ञानिक आजीविका के गुर सिखाएंगे। इसे लेकर आईसीएफआरई और आईसीआईएमओडी काठमांडू नेपाल के बीच समझौते पर किए गए। इतना ही नहीं आईसीएफआरई और आईसीआईएमओडी काठमांडू नेपाल के बीच हुए समझौते में इस बात पर भी सहमति बनी है कि दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन, हिमालयन इकोलॉजी और वन अनुसंधान के क्षेत्र में एक दूसरे वैज्ञानिक जानकारियां साझा करेेंगे।
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दोनों संस्थानों के बीच हुए समझौते पर आईसीएफआरई के महानिदेशक अरुण सिंह रावत और आईसीआईएमओडी के महानिदेशक डॉ. पेमा ग्यामत्सो ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर दोनों संगठनों के प्रमुखों ने शिक्षा, अनुसंधान और विकास में आपसी तालमेल के साथ वैज्ञानिक शोधों में जानकारियां साझा करने पर सहमति जताई। सहमति बनी कि दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक पारिस्थितिकी सुरक्षा, क्षमता निर्माण और पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्र पर जानकारियां साझा करने के साथ ही जलवायु परिवर्तन जैसे अहम मुद्दों पर एकजुट होकर काम करेंगे। निर्णय लिया गया कि दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक हिंदू कुश हिमालय की पहाड़ियों में रहने वाले वन आश्रित समुदायों की आजीविका को बढ़ावा देने में योगदान देंगे। दूसरी ओर भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई ) और सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट( सीमैप) के बीच भी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के तहत दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक वानिकी अनुसंधान, शिक्षा और ज्ञान साझा करने के विस्तार देने के साथ ही वानिकी, प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित क्षेत्रों में हितधारकों की क्षमता निर्माण में अपना योगदान देंगे। दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक औषधीय और सुगंधित पौधों की विस्तार गतिविधियों के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के साथ ही नीति अनुसंधान, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं, नदी बेसिन का कायाकल्प, हरित कौशल विकास कायर्क्रम, जैव विविधता डेटाबेस, वैज्ञानिकों और शोध पत्रों का आदान-प्रदान और सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं को बढ़ावा भी देंगे। समझौते पर आईसीएफआरई के महानिदेशक अरुण सिंह रावत व सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने हस्ताक्षर किए।
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