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वैज्ञानिकों को एक गुफा में मिली ऋग्वैदिक काल के दस राजाओं की निशानियां

Sun, 04 Sep 2016 07:53 PM IST
रजा शास्त्री / अमर उजाला, देहरादून
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painting on cave wall - फोटो : amar ujala
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ऋग्वेद के सातवें अध्याय में पैसुनी नदी के किनारे जिन दस राजाओं के युद्ध का जिक्र है, उसकी कुछ निशानियां विंध्याचल क्षेत्र की एक गुफा में मिली हैं।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक इस युद्ध के बाद ही देश में आर्य और अनार्य संस्कृतियों का मिलन हुआ था। हाल ही में एंथ्रोपोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने विंध्याचल इलाके की एक बड़ी गुफा की चट्टानों पर बनी इन पेटिंग को देखा।

एएसआई टीम को हुसंगाबाद से 40 किलोमीटर दूर बुधनी तहसील की नकटी तलाई के पास गुफा में ये रॉक पेंटिंग मिली हैं। यह गुफा डेढ़ फुट लंबी और चार फुट चौड़ी है। इसी की चट्टानों पर विभिन्न प्रकार के युद्ध दृश्यों की पेंटिंग बनी हुई हैं।
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हजारों साल पुरानी हैं ये पेंटिंग्स

painting on cave wall
ये पेंटिंग हजारों साल पुरानी ऋग्वेद कालीन मानी जा रही हैं। इन पेंटिग में धनुष-बाण, भाला और तलवारों से युद्ध करते हुए दिखाया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आर्यों के आने के बाद ही तलवार का इस्तेमाल शुरू हुआ था। अनार्य उस वक्त भी तीर, भाला से युद्ध किया करते थे। आर्यों के समय में ही युद्ध में घोड़ों का इस्तेमाल बढ़ा था।

वैसे तो नकटी तलाई की इस गुफा में लोग अर्से से इन पेंटिंग को देख रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने इनका अध्ययन पहली बार शुरू किया है। इन पेंटिंग को संरक्षित करने की दिशा में भी एएसआई ने प्रयास शुरू किए हैं।

वैज्ञानिकों का तर्क है कि दस राजाओं के युद्ध के बाद एक बड़ा बदलाव आया था। इस युद्ध की चर्चा हर जगह रही। इससे प्रभावित होकर ये पेंटिंग बनाई गई होंगी। उस वक्त विंध्य और सतपुड़ा रेंज की गुफाओं में प्राचीन काल के लोगों के वासस्थल रहे हैं।

नकटी तलाई की गुफा में मिली पेंटिंग हजारों साल पुरानी हैं। इन पेंटिंग को दस राजाओं के युद्ध से जोड़कर देखा जा रहा है। पेंटिंग से दो संस्कृतियों के लोगों के युद्ध के तरीके स्पष्ट होते हैं।
- डॉ. एआर सांख्यान (वरिष्ठ वैज्ञानिक, एएसआई)
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