उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र के जनपद पिथौरागढ़ में सबसे अधिक स्कूल जीर्ण शीर्ण है। 155 स्कूलों में से 30 स्कूल क्षतिग्रस्त मिले हैं।
चंपावत और बागेश्वर में एक भी स्कूल क्षतिग्रस्त नहीं
मंगलवार प्रदेश भर में स्कूलों के औचक निरीक्षण में यह स्थिति सामने आयी है। वही अफसरों को चंपावत और बागेश्वर में एक भी स्कूल क्षतिग्रस्त नहीं मिला।
शिक्षा महानिदेशक राधिका झा के निर्देश पर मंगलवार प्रदेश भर के 1389 स्कूलों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अफसरों को एक कॉलम विद्यालय भवन की स्थिति का दिया गया था। इसमें पिथौरागढ़ में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने 150 और शिक्षा महानिदेशालय के अधिकारियों ने पांच स्कूलों का निरीक्षण किया।
जिसमें अफसरों को 30 स्कूल जीर्ण शीर्ण मिले हैं। दूसरे नंबर पर पौड़ी जनपद है। यहां 250 स्कूलों में से 21 और चमोली में 106 स्कूलों में से 17 स्कूल जीर्ण शीर्ण मिले। इसके अलावा अल्मोड़ा में पांच, देहरादून में चार, नैनीताल में दो और रुद्रप्रयाग में सात स्कूल जीर्ण शीर्ण मिले।
क्षतिग्रस्त कुछ स्कूल भवन तो गिरने की स्थिति में हैं। जहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद बच्चे इन जर्जरहाल स्कूल भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं।
1389 में से 90 मिले जर्जर
प्रदेश भर में 1389 स्कूलों में से 90 स्कूल जर्जरहाल मिले हैं। इसमें 81 स्कूल जिला स्तरीय अधिकारियों के निरीक्षण एवं नौ स्कूल शिक्षा महानिदेशालय के अधिकारियों को क्षतिग्रस्त मिले।
जर्जर हाल स्कूलों को ठीक किए जाने के लिए हम लगातार दो साल से इसे एसएसए (सर्व शिक्षा अभियान) में प्रस्ताव रखते आ रहे हैं, लेकिन इसके लिए हमें बजट नहीं मिल पाया। नाबार्ड से भी बजट नहीं मिल पाया। अब हम फिर से इसके लिए शासन में प्रस्ताव भेज रहे हैं।
- राधिका झा, शिक्षा महानिदेशक