बिना सत्यापन के छात्रवृत्ति जारी करने के आरोप में एसआईटी ने पूर्व समाज कल्याण अधिकारी (देहरादून) दिनेश जोशी को गिरफ्तार किया है। जोशी पर आरोप है कि उन्होंने बिना सत्यापन के ही रुड़की के इंस्टीट्यूट को 75 लाख रुपये से अधिक छात्रवृत्ति जारी की। इस मुकदमे में पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी रामवतार को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
एसआईटी के अनुसार श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रुड़की को 1.48 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई थी। यह धनराशि 2012 से 2015 के बीच जारी की गई। इसमें अनियमितता पाए जाने पर डालनवाला थाने में संस्थान के खिलाफ वर्ष 2019 में मुकदमा दर्ज कराया गया। संस्थान के मालिक राजू बाबू अग्रवाल आदि छह के खिलाफ आरोपपत्र भी इस मुकदमे में दाखिल किया जा चुका है। विवेचना में पाया गया कि तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी रामवतार और सहायक समाज कल्याण अधिकारी दिनेश जोशी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह धनराशि प्रदान की है। इस मामले मे रामवतार को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
बिना सत्यापन के धनराशि जारी कर दी
एसआईटी के अनुसार सोमवार को दिनेश जोशी को बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया था। इस बीच उसने पुलिस टीम को बताया कि उस वक्त उन्होंने किसी भी छात्र का भौतिक सत्यापन नहीं किया था। बिना सत्यापन के ही उन्होंने यह धनराशि जारी कर दी थी। दिनेश जोशी के खिलाफ इस मुकदमे के अलावा चार और मुकदमे दर्ज हैं। दिनेश जोशी पंडितवाड़ी देहरादून में रहते हैं। वह वर्तमान में सहायक खंड विकास अधिकारी डूंडा ब्लॉक में तैनात हैं। उन्हें न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश पर जोशी को जेल भेज दिया गया है।