राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक के पद पर दीपक कुमार की नियुक्ति में भारी अनियमितताएं भी बरती गई हैं, जिसका खुलासा सचिव सहकारिता की जांच रिपोर्ट में हुआ है। यह जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में भेजी गई है। दीपक कुमार की नियुक्ति इतनी जल्दबाजी में की गई कि अंतिम अनुमोदन के लिए फाइल न तो मंत्री और न ही मुख्यमंत्री को भेजी गई।
ऐसे में इस नियुक्ति पर पुनर्विचार के लिए भी जांच अधिकारी ने सिफारिश की है। खबर है कि दीपक कुमार से संबंधित मूल पत्रावली गायब हो गई है।
बीते माह जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक काडर से राज्य सहकारी बैंक में प्रतिनियुक्ति पर आए दीपक कुमार को राज्य सहकारी बैंक का प्रबंध निदेशक बनाया गया था। बाद में पता चला कि दीपक कुमार के विरुद्ध विभागीय जांच चल रही हैं और उन्हें एक मामले में प्रतिकूल प्रविष्टि भी मिली है।
इन सूचनाओं के आधार पर शासन ने उनकी नियुक्ति की जांच सहकारिता सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम को दी। सचिव ने जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दी है। सीएम कार्यालय के सूत्रों की मानें तो टिहरी जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक पद पर तैनाती के दौरान इफको टोक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी से खाताधारकों का अनिवार्य दुर्घटना बीमा करा दिया गया।
प्रीमियम की राशि भी खाताधारकों की मर्जी के बगैर खाते से निकाल ली गई। इस मामले में नाबार्ड की शिकायत पर जांच हुई, जिसमें तत्कालीन सचिव विजय धौंडियाल ने दीपक कुमार को एक ओर क्लीन चिट दे दी। वहीं दूसरी तरफ खाताधारकों की राशि को समायोजित करने व भविष्य में इस प्रकार की हरकत न किए जाने के निर्देश भी दे दिए।
इसके अलावा चमोली में तैनाती के दौरान अनियमिततापूर्ण खरीद के मामले में भी जांच विधिपूर्वक संपन्न नहीं हुई। सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट में इन दोनों ही जांचों को संदिग्ध तरीके से समाप्त कर दिया गया। इसके अलावा नियुक्ति की फाइल में इनका कहीं जिक्र तक नहीं किया गया।
यही नहीं तैनाती के पूर्व विभागीय मंत्री या मुख्यमंत्री का अंतिम अनुमोदन भी नहीं लिया गया। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट में साफतौर पर एमडी की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने के साथ ही नए सिरे से जांच कमेटी बनाने की सिफारिश की है। यह भी कहा है कि भविष्य में ऐसे संवेदनशील पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया में संशोधन किए जाएं।