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कैसे कांग्रेस के इस बागी ने भाजपा को दिखा दिया अपना दम, जानिए यहां...

Tue, 15 Aug 2017 08:23 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
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सतपाल महाराज - फोटो : AmarUjala
अपने आश्रम के मुख्य गेट पर कूड़ा फेंक देने से बेहद खफा उत्तराखंड कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश भाजपा नेतृत्व को अपने कद का अहसास कराकर ही दम लिया। बता दें कि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज कांग्रेस के उन बागियों में शामिल हैं, जिन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की सत्ता हिलाकर रख दी थी।
 
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कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक को भी निशना बनाया

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madan kaushik
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट जब उन्हें नहीं मना पाए तब राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से भी करीब 24 मिनट की बातचीत के बाद महाराज ने अनुशासन समिति की जांच को लेकर हामी भरी।
 
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haridwar fight
प्रेमनगर आश्रम की दीवार तोड़ने से लेकर मुख्य गेट पर कूड़ा फेंकने का विवाद जब दिल्ली दरबार में पहुंचा तब विवाद को तुरंत सुलझाने की एक्सरसाइज शुरू कर दी गई। सतपाल महाराज की राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शह से करीबी जगजाहिर है लिहाजा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को हरिद्वार पहुंचकर विवाद सुलझाने के लिए कहा।

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रमेश पोखरियाल निशंक - फोटो : अमरउजाला
प्रदेश अध्यक्ष ने सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, विधायक आदेश चौहान, स्वामी यतीश्वरानंद, सुरेश राठौर, संजय गुप्ता, जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह चौहान, प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य ओमप्रकाश जमदग्नि, जिला प्रभारी अनिल गोयल को प्रेमनगर आश्रम में बुलाया। इसके बाद कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के साथ वार्ता का दौर शुरू हुआ।

 
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satpal maharaj
सूत्रों की मानें तो सांसद और विधायकों ने जहां सतपाल महाराज की हां में खुलकर हां मिलाई वहीं कुछ विधायकों ने कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक को भी निशना बनाया। मेयर मनोज गर्ग पर तो सभी ने हमला बोला। करीब डेढ़ घंटे तक चली बैठक के बाद सांसद और विधायक कमरे से निकल आए तब तक महाराज टस से मस नहीं हुए थे। वे अपने आश्रम की खराब हुई छवि की भरपाई के लिए अड़े हुए थे।  इसके बाद भी प्रदेश अध्यक्ष और जिला प्रभारी ही महाराज की मान मनौव्वल में जुटे रहे।

 
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पंत विवि की समस्याओं को लेकर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज से मिलते विधायक और कुलपति - फोटो : amar ujala
जब महाराज अडिग रहे तो फिर आखिर में प्रदेश अध्यक्ष ने राष्ट्रीय अध्यक्ष से महाराज की अपने मोबाइल फोन से बात कराई। सूत्रों के अनुसार करीब 24 मिनट हुई बातचीत में सतपाल महाराज ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष अपनी बात रखी। आखिर में पूरा मामला अनुशासन समिति को सौंपे जाने पर महाराज मान गए। हालांकि, महाराज की मान मनौव्वल में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के भी पसीने छूट गए, अंत में पूरे प्रकरण की गेंद राष्ट्रीय अध्यक्ष के पाले में ही डालनी पड़ गई।  
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