17 साल तक रो-रोकर जिस मां ने अपने आंखों की रोशनी गंवा दी, आज उसे मानो कुदरत ने सूद समेत सब लौटा दिया। नेपाल की संवासिनी शुक्रवार सुबह जब कोटद्वार के लिए निकली तो चेहरे पर वर्षों के दुख की जगह खुशी थी। बूढ़े कंधों में वो थकावट न थी। दाईं तरफ बेटा था और बाईं तरफ दामाद। खुशी-खुशी पुलिस अभिरक्षा में वह कोटद्वार के लिए रवाना हो गई। वैसे, नारी निकेतन प्रबंधन ये चुस्ती पहले दिखाता तो इस मां को बहुत पहले उसका परिवार मिल गया होता।
विदाई पर रो पड़ीं संवासिनियां
शुक्रवार सुबह आठ बजे नारी निकेतन प्रबंधन ने सारी कागजी कार्रवाई कर दी थी। नारी निकेतन की दूसरी संवासिनियों ने उसे विदाई दी। विदा करते वक्त सब रो पड़ीं। बूढ़ी मां ने उन्हें भी जल्दी से अपने परिवार में पहुंचने के लिए दुआ दी। जो छोटी थीं उनके सिर पर हाथ फेरा।
मां की तरह उन्हें खुश रहने के कुछ मशविरे भी दिए, फिर बेटे और दामाद के साथ घर के लिए चल दी। वह दोपहर को कोटद्वार पहुंचीं। वहां भी सारी कागजी कार्रवाई पूरी थी। बस खानापूरी होनी थी जो चंद मिनट में हो गई। बाद में सब हरिद्वार के लिए रवाना हो गए। हरिद्वार पहुंच कर यहां से उन लोगों ने नेपाल सीमा तक जाने के लिए बस पकड़ ली।
2007 में पहुंची थी दून
अपर सचिव मनोज चंद्र ने बताया कि महिला को वर्ष 2007 में दून नारी निकेतन भेजा गया था। सुबह उनके यहां से निकलने के बाद बराबर खैरियत ली जाती रही। बिहार और दूसरे प्रदेश की कुछ और संवासिनियां हैं, उनके घर-पते की भी जानकारी ली जा रही है।