शासन की अनुमति के बिना संविदाकर्मियों की नियुक्तियां कराने के मामले में पूर्व डीजी हेल्थ डा. भट्ट लंबे समय से जांच से भाग रहे थे लेकिन आखिरकार जांच टीम ने अहम सुराग जुटा लिए है। जिससे पूर्व डीजी हेल्थ की मुश्किलें बढ़ सकती है।
सीएमओ पद पर कार्यरत रहने के दौरान खरीद में गड़बड़ी और बिना शासन की अनुमति के संविदाकर्मियों की नियुक्तियां करने के आरोप पूर्व डीजी हेल्थ डा. भट्ट के ऊपर है। इस मामले में जांच टीम के हाथ कुछ महत्वपूर्ण सुराग लगने का दावा किया जा रहा है। लेकिन आखिरकार जांच टीम ने अहम सुराग जुटा लिए है। जिससे पूर्व डीजी हेल्थ की मुश्किलें बढ़ सकती है।
सीएमओ पद पर कार्यरत रहने के दौरान खरीद में गड़बड़ी और बिना शासन की अनुमति के संविदाकर्मियों की नियुक्तियां करने के आरोप पूर्व डीजी हेल्थ डा. भट्ट के ऊपर है। इस मामले में जांच टीम के हाथ कुछ महत्वपूर्ण सुराग लगने का दावा किया जा रहा है।
पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. आरपी भट्ट वर्ष 2013 में सीएमओ देहरादून के पद पर कार्यरत रहे। इस दौरान उन पर खरीद में गड़बड़ी और बिना शासन की अनुमति के बिना संविदाकर्मियों को नियुक्ति देने के आरोप लगे। हालांकि तब डा. भट्ट जांच से बच निकले और बाद में स्वास्थ्य महानिदेशक रहने तक कोई जांच नहीं हुई। अब सेवानिवृत्त के बाद यह दोनों मामले एक बार फिर सामने आ गए हैं।
स्वास्थ्य निदेशक डॉ. आभा मंमगाई के नेतृत्व में विभाग ने मामले की जांच के लिए टीम गठित की है। टीम पिछले कई दिनों से इस मामले की जांच में जुटी है। सूत्रों के अनुसार दोनों ही मामलों में ज्यादातर तथ्य पहले से ही सार्वजनिक हैं, जिनमें डॉ. भट्ट पर लगने वाले आरोप काफी हद तक पुष्ट होते हैं। वहीं जांच टीम के हाथ भी कुछ अहम सुराग लगे हैं। हालांकि टीम फिलहाल किसी भी तरह की जानकारी सार्वजनिक करने से बच रही है।