राज्य में दूसरा सैनिक स्कूल खोलने की रक्षा मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद शिक्षा विभाग और सैनिक कल्याण विभाग में तनातनी चल रही है। सैनिक स्कूल सोसाइटी ने 19 नवंबर 2014 को स्कूल निर्माण के लिए एमओयू (मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर के लिए पत्र भेजा था पर खींचतान के चलते प्रदेश शासन अब तक कोई फैसला नहीं ले पाया है।
दरअसल यह मामला प्रशासनिक से ज्यादा राजनीतिक और क्रेडिट लेने का बन चुका है जिससे अधिकारी भी कुछ करने में हिचक रहे हैं। समाधान निकालने के लिए मंगलवार को मुख्य सचिव एन रविशंकर ने खींचतान कर रहे दोनों विभागों के अधिकारियों को बुलाया।
नियमानुसार स्कूल का मामला शिक्षा विभाग के अधीन आता है, लेकिन प्रस्ताव से लेकर अनुमति तक की औपचारिकताएं सैनिक कल्याण विभाग ने पूरी की हैं। इसलिए सैनिक कल्याण मंत्री हरक सिंह रावत चाहते हैं कि स्कूल का निर्माण उनका महकमा करे।
दूसरी ओर, शिक्षा विभाग का तर्क है कि निर्माण के बाद स्कूल उनके अधीन आएगा इसलिए एमओयू पर दस्तखत उन्हें ही करना चाहिए। मुख्य सचिव के हस्तक्षेप के बाद भी यह तय नहीं हो पाया कि एमओयू पर हस्ताक्षर कौन करेगा। हालांकि उन्होंने अपर मुख्य सचिव एस राजू को दोनों विभागों से तालमेल कर अग्रिम कार्यवाही जल्द पूरी कराने के निर्देश दिए हैं।