धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मामले में जहां एक ओर पुलिस ने बिना देरी किए भाजपा नेताओं समेत 250 लोगों पर रविवार दोपहर को ही मुकदमा दर्ज कर लिया था तो वहीं दूसरे पक्ष का मुकदमा अगले दिन लगभग उसी समय यानी 24 घंटे बाद दर्ज किया गया। रविवार देर रात तक दूसरे पक्ष के साथ भाजपाई तहरीर तक नहीं रिसीव करा पाए थे।
रुड़की में रविवार को चर्च में हुई तोड़फोड़ और मारपीट की घटना ने पुलिस-प्रशासन को सकते में ला दिया था। सूत्रों के अनुसार, मामले की गूंज दून से दिल्ली तक भी पहुंची। ईसाई समुदाय से जुड़े संगठनों की ओर से दिल्ली समेत विभिन्न प्रदेशों में स्थित अपने संस्थानों तक यह बात पहुंचाई गई। माना जा रहा है मानवाधिकार और अल्पसंख्यक आयोग की संभावित कार्रवाई को लेकर भी पुलिस प्रशासन फूंक-फूंककर कदम रख रहा था।
शायद इसीलिए पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज करने में देरी नहीं की, लेकिन मुकदमा दर्ज होने के साथ जैसे ही भाजपाइयों और हिंदूवादी संगठनों में प्रतिक्रिया तेज हुई तो पुलिस और प्रशासन की बेचैनी भी बढ़ने लगी, लेकिन पुलिस ने दूसरा पक्ष का मामला जल्दबाजी में दर्ज नहीं किया। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रविवार देर रात तक दूसरे पक्ष की महिलाओं समेत कई भाजपा नेता सिविल लाइंस कोतवाली में जमे रहे, लेकिन पुलिस ने तहरीर को रिसीव तक नहीं किया। इस दौरान कई आला नेताओं के फोन आते रहे, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी। रात करीब 11 बजे ये लोग कोतवाली से लौट आए। माना जा रहा है कि रात के बाद आधा दिन तक उच्च स्तर पर मंथन के बाद दूसरे पक्ष की रिपोर्ट दर्ज हुई।