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उत्तराखंड में नदियों ने बदले अपने रास्ते, बड़ी तबाही के संकेत

Sat, 02 Jul 2016 04:05 PM IST
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • आपदा से हो गया रिवरबेड पर जमाव
  • पहाड़ों के कटे किनारे कभी भी धसक सकते हैं
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विज्ञानियों के अध्ययन में यह बात सामने आई है। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा ने सिर्फ जन-धन की हानि ही नहीं पहुंचाई, बल्कि भौगोलिक स्थिति को भी प्रभावित किया है। मुख्य धारा पर मिट्टी, रेत-बजरी के जमाव से नदियों के रास्तों में बदलाव आ गया है। इसके अलावा मिट्टी की ऊपरी सतह के बह जाने से मंदाकिनी घाटी समेत अन्य क्षेत्र भूस्खलन के प्रति और संवेदनशील हो गए हैं।
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इससे बारिश के दौरान यहां खतरे बढ़ गए हैं। नदियों की धारा के इस बदलाव से कटान के कारण नए भूस्खलन जोन पैदा हो गए, जिन्हें अभी चिन्हित नहीं किया गया। विज्ञानियों का कहना है कि तेज बारिश में यहां भूस्खलन जल्दी और अधिक हो सकता है।

आपदा के बाद यह बदलाव मंदाकिनी घाटी में अधिक आया है। मंदाकिनी और इसकी सहयोगी नदियों के रास्तों में बदलाव की पुष्टि हो चुकी है। मंदाकिनी नदी में सोनप्रयाग, सीतापुर, बांसबाड़ा, सियालसौड़ चंद्रपुरी, गबनी, गंगानगर, विजयनगर, रामपुर, तिलवाड़ा आदि स्थानों पर नदी की धारा अपने स्थान से खिसकी है। इसी तरह मध्यमहेश्वर ने गौंडर और पौंडर में अपने रास्ते में बदलाव किया है। इस बदलाव नदियों के बेसिन का पूरा सिस्टम ही बदल रहा है। अपने मुख्य मार्ग से नदी की धार तेज बारिश में बेलगाम हो सकती है।
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रिवरबेड पर सेडीमेंटेशन बढ़ने से धारा बदली

नदी के तल में रेत-बजरी जमा होने से धारा बदल जाती है। - फोटो : amar ujala
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के विज्ञानियों और आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन विभाग ने मौके पर जाकर बदलाव की स्थिति देखी है। विज्ञानियों का कहना है कि आपदा के दौरान रिवरबेड पर मिट्टी, चूना, रेत-बजरी (सेडीमेंटेशन) जमा हो गया है जिससे नदियों के किनारे कटकर ढह गए। नदियों पर कार्य कर रहे वाडिया के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. संतोष राय का कहना है कि ‘रिवरबेड पर सेडीमेंटेशन बढ़ने से धारा बदल जाती है।’ इसके अलावा पहाड़ों की ऊपरी सतह से मिट्टी के साथ इसे बांधे रखने वाली वनस्पतियां बह गई हैं। इससे मिट्टी धसकने का खतरा बढ़ गया।

मंदाकिनी
सोन प्रयाग-5 से 6 मीटर जमाव, 2  से 5 मीटर धारा में बदला
सीतापुर-3 से 4 मीटर जमाव, 5 से 7 मीटर धारा में बदलाव
बांसबाड़ा-2 से 3 मीटर जमाव, 8  से 10 मीटर धारा में बदलाव
सियालसौड़-1  से 2 मीटर जमाव, 5 से 8 मीटर धारा में बदलाव
चंद्रपुरी-3 से 4 मीटर जमाव, 10 से 15 मीटर धारा में बदलाव
गबनी-1 से 2 मीटर जमाव, 2 से 3 मीटर धारा में बदलाव
गंगानगर-2 से 3 मीटर जमाव, 3  से 5 मीटर धारा में बदलाव
विजयनगर-4 से 5 मीटर जमाव, 10 से 15 मीटर धारा में बदलाव
रामपुर-1 से 2 मीटर जमाव, 2 से 4 मीटर धारा में बदलाव
तिलवाड़ा-2 से 3 मीटर जमाव, 3 से 5 मीटर धारा में बदलाव 

मद्महेश्वर
गौंडर-3  से 4 मीटर जमाव, 3 से 5 मीटर धारा में बदलाव
पौंडर-5 से 6 मीटर जमाव, 2  से 4 मीटर धारा में बदलाव 

Published By: Vivek Singh
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