आरटीआई अधिनियम में सूचना न देने के कौन-कौन से तरीके अपनाए जा रहे हैं, इसका खुलासा इस मामले से हो रहा है।
500 से अधिकारियों को सौंपा यह जिम्मा
पब्लिक स्कूलों से संबंधित सूचना हासिल करने के लिए 500 से अधिक लोक सूचना अधिकारियों को यह जिम्मा सौंप दिया गया। राज्य सूचना आयोग ने इस पर कड़ी आपत्ति जाहिर की है। हरिद्वार निवासी रमेश चंद्र शर्मा ने शिक्षा विभाग से आरटीआई के तहत पूछा था कि पब्लिक स्कूलों में फीस की मनमानी पर रोक लगाने के लिए क्या-क्या प्रावधान हैं।
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रमेश चंद्र शर्मा को यह जवाब तो नहीं मिला पर शिक्षा निदेशालय ने यह मामला जिला शिक्षा अधिकारियों पर डाल दिया। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से जब यह सूचना मांगी गई तो जिला शिक्षा अधिकारियों ने खंड शिक्षा अधिकारियों और खंड शिक्षा अधिकारियों ने स्कूलों के प्रधानाचार्यों से यह सूचना मांग ली।
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ऐसे करीब 500 प्रधानाचार्य हैं जिन्हें यह सूचना देनी पड़ी। इन प्रधानाचार्यों ने भी साफ कह दिया कि उनके पास यह सूचना नहीं है। राज्य सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल ने इस मामले में कड़ी आपत्ति जताई। आयुक्त के मुताबिक नई नियमावली में साफ प्रावधान है कि एक से अधिक को पक्षकार नहीं बनाया जाना चाहिए।
सूचना उपलब्ध कराने को कहा
पर शासन स्तर से इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारियों के अधीन करीब 500 सरकारी और गैर सरकारी प्रधानाचार्यों से सूचना मांग ली गई। वह भी बिना यह बताए कि कौन सी सूचना है जो उन्हें देनी है।
प्रधानाचार्यों ने साफ कह दिया कि सूचना उनके पास नहीं है। लिहाजा यह सूचना निदेशालय स्तर पर होनी चाहिए। अब राज्य सूचना आयोग ने शासन को पक्षकार बनाते हुए यह सूचना उपलब्ध कराने को कहा है।
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