राज्य के आपदाग्रस्त इलाकों के कई गांवों में अभी भी लोग भूखे हैं, लेकिन सरकारी मशीनरी की लापरवाही से गोदामों में गल्ला सड़ रहा है। दावा किया जा रहा है कि हर जगह राहत सामग्री पहुंचा दी गई है, लेकिन चमोली जिले के नारायणबगड़ ब्लाक में ही 35 से ज्यादा गांव आज भी अलग-थलग पड़े हुए हैं।
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यहां आपदा के 45 दिन बाद भी वहां न तो कोई अधिकारी पहुंचा है और न ही राहत सामग्री। ऐसा हाल कमोबेश हर जिले में कई गांवों का है। जबकि उत्तरकाशी, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और गौचर के गोदामों में विभिन्न राज्यों और संस्थाओं से आई राहत सामग्री भरी पड़ी है। कहीं-कहीं यह सड़ने भी लगी है।
मार्गों ने भी राहत रोकी
रुद्रप्रयाग में बनाए गए अस्थायी गोदामों में गुजरात और संस्थाआें की ओर से भेजी गई राहत सामग्री का ढेर लगा हुआ है। प्रशासन का कहना है कि सड़कें बाधित होने से राहत सामग्री भेजने में परेशानी हो रही है। उत्तरकाशी में गंगोत्री हाईवे बंद होने और गांवों के पैदल रास्ते खराब होने से तमाम गांवों में गेहूं चावल अभी तक नहीं पहुंच पाया है।
गोरसाली में हैलीकॉप्टर से राशन पहुंचाने के बावजूद पूरी राहत सामग्री नहीं जा पाई। उत्तरकाशी से भटवाड़ी तक मजदूरों और खच्चरों से राशन ले जाने की कोशिशें भी नाकाफी साबित हो रही हैं। जिससे गोदामों में डंप आटे के बैग खराब हो रहे हैं। मट्ठी बैग, कुरकुरे, भुना चना, सत्तू के बैग में सीलन आ रही है। यहां 1053 पैकेट ब्रेड खराब होने पर उन्हें फेंकना पड़ा।
प्रशासन के पास सिर्फ दावे
प्रशासन का दावा है कि उत्तरकाशी जिले में अलग-थलग पड़े 135 गांवों के 18,009 परिवारों में से 17,911 परिवारों तक राशन पहुंच चुका है। सिर्फ भटवाड़ी ब्लाक के 98 परिवारों तक राशन पहुंचना बाकी है। जबकि चमोली जिले के नारायणबगड़ ब्लाक के आपदाग्रस्त पैतीस से अधिक गांवों में सरकारी राशन का एक दाना भी नहीं पहुंचा है।
कुछेक स्वयंसेवी संस्थाओं ने नजदीकी गांवों में राहत पहुंचाई है। श्रीनगर में तो हाल और भी खराब हैं। यहां प्रशासन सिर्फ 85 पैकेट ही बांट पाया है। यहां पौड़ी जिले के लिए दो माह के राशन का भंडारण किया गया है। एसडीएम का कहना है कि जो भी आपदा पीड़ित सामग्री लेने के लिए पहुंच रहा है, उसे गोदाम से राहत सामग्री जी जा रही है।
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