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रेखा आर्य और भीमलाल आर्य की विधानसभा सदस्यता समाप्त

Fri, 10 Jun 2016 12:42 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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रेखा आर्या - फोटो : AmarUjala
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सोमेश्वर विधायक रेखा आर्य और घनसाली विधायक भीमलाल आर्य की सदस्यता दलबदल कानून के तहत समाप्त हो गई है। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने दोनों पक्षों करे सुनने के बाद दोनों सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने का फैसला सुनाया। अब विधानसभा में सदस्यों की संख्या 61 से घटकर 59 हो गई है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत समेत नौ सदस्यों के खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई हो चुकी है।
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सोमेश्वर विधायक रेखा आर्य और घनसाली विधायक भीमलाल आर्य ने गत 10 मई को फ्लोर टेस्ट के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए मतदान किया था। सोमेश्वर विधायक रेखा आर्य ने कांग्रेस और विधायक भीमलाल आर्य ने भाजपा से बगावत कर क्रास वोटिंग की थी।

भाजपा के मुख्य सचेतक विधायक मदन कौशिक की ओर से विधायक भीमलाल आर्य के खिलाफ और कांग्रेस की मुख्य सचेतक डॉ. इंदिरा हृदयेश की ओर से विधायक रेखा आर्य के खिलाफ दलबदल कानून के तहत याचिका दायर की गई थी।
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भीमलाल ने कहा, 'फैसला स्वीकार, नहीं जाएंगे हाईकोर्ट'

भीमलाल आर्य - फोटो : AmarUjala
विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने दोनों विधायकों के अधिवक्ताओं और याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद दोनों विधायकों को पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर वोटिंग करने का दोषी पाया। विधानसभा अध्यक्ष ने दोनों सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने का आदेश सुनाया।

फैसले के बाद भीमलाल आर्य ने कहा कि जो फैसला सुनाया गया है, वह स्वीकार है। इस फैसले को न ही हाईकोर्ट और न ही सुप्रीमकोर्ट में चुनौती देंगे। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत, विधायकगण सुबोध उनियाल, प्रदीप बत्रा, कुंवर प्रणव सिंह ‘चैंपियन’, अमृता रावत, शैलारानी रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल, उमेश शर्मा काऊ को दलबदल करने पर अपनी विधायकी गंवानी पड़ी थी।

राज्य गठन के बाद यह पहली बार है जब 70 सदस्यीय सदन में 11 सदस्यों को दलबदल कानून के तहत अपनी विधायकी छोड़नी पड़ी है।

इनका है कहना
स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल की ओर से रेखा आर्य और भीमलाल की सदस्यता समाप्त करने का निर्णय बेहद सराहनीय है। इससे संसदीय प्रणाली, संविधान एवं प्रजातंत्र की रक्षा हुई है। राज्यसभा चुनाव के बाद यदि इन दोनों सदस्यों को बर्खास्त किया जाता तो किसी न किसी पार्टी को चुनाव में इनका लाभ होता। मगर बिना किसी राग-द्वेष के लिया गया यह निष्पक्ष, पारदर्शी निर्णय लिया गया है।
-जयदेव सिंह, प्रमुख सचिव विधायी एवं संसदीय कार्य
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