आशीष कहते हैं कि हम जिन अभाव में पढ़े, वह आगे की पीढ़ी को महसूस नहीं होना चाहिए। इसलिए मैं कम संसाधनों में नए प्रयोग करके बच्चों के लिए सरकारी स्कूल को स्मार्ट स्कूल बनाना चाहता हूं। समाज के सक्षम लोगों को अपने साथ जोड़कर वह स्कूल के विकास में उनकी भी सहभागिता बढ़ा रहे हैं। बताया कि कोरोना के चलते उनकी बहुत सी योजनाएं रुकी हुई है, लेकिन हालात सामान्य होते ही वह उन पर तेजी से काम करेंगे।
यह है भारती प्रोजेक्ट
आशीष ने बताया कि हाईस्कूल और इंटर तक बेटियों की शिक्षा का स्तर अच्छा है। हर साल हाईस्कूल, इंटर की परीक्षाओं में बेटियों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की खबरें हम पढ़ते हैं, लेकिन इसके बाद उच्च शिक्षा में उनकी उपस्थिति बहुत कम नजर आती है।
इसके पीछे कई वजह हैं, या तो उन्हें परिवार का सहयोग नहीं मिलता या फिर घर की आर्थिक स्थिति के कारण वह आगे नहीं बढ़ पाती। आशीष ने कहा कि अभी वह इस पर ज्यादा जानकारी नहीं दे सकेंगे, लेकिन भारती प्रोजेक्ट पहाड़ की उन बेटियों को उड़ान देगा जो कुछ करना चाहती हैं।
घराट को लेकर काम करने पर आए थे चर्चा में
आशीष डंगवाल घराट को लेकर काम करने पर सुर्खियों में आए थे। जब उनका राजकीय इंटर कॉलेज भंकोली उत्तरकाशी से ट्रांसफर हुआ तो बच्चों से लेकर पूरा गांव उनकी विदाई समारोह में रोने लगा था। ऐसी विदाई किसी शिक्षक को नहीं मिली होगी। उन्होंने गांव में विलुप्त हो चुके घराट (पनचक्की) को लेकर काम किया। उन्होंने स्कूल के बच्चों के साथ मिलकर घराट के स्वरूप को बदला, जिसे फेसबुक पर लोगों ने खूब पसंद किया।