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उत्तराखंड: युवाओं के लिए अच्छी खबर, अशासकीय स्कूलों में लटकी शिक्षक भर्ती का रास्ता साफ

Sat, 21 Dec 2019 10:12 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • चुनाव आचार संहिता के चलते फरवरी 2019 में लटक गई थी शिक्षकों की भर्ती
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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प्रदेश के अशासकीय स्कूलों में लटकी शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भर्ती के प्रस्ताव पर शिक्षा मंत्री के अनुमोदन के बाद भर्ती का रास्ता साफ हो गया। शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को लोक सभा और इसके बाद पंचायत चुनाव की आचार संहिता के चलते पूरा नहीं किया जा सका था।

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शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के मुताबिक भर्ती की अधूरी प्रक्रिया को अब पूरा किया जाएगा। प्रदेश के अशासकीय स्कूलों में शिक्षकों, प्रिंसिपलों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की इसी वर्ष जनवरी और फरवरी में भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

विभिन्न जनपदों की ओर से इसके लिए नियुक्ति विज्ञप्ति निकालकर अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे गए थे। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक तीन महीने के भीतर भर्ती की प्रक्रिया पूरी होनी थी, लेकिन फरवरी 2019 में लोक सभा चुनाव और इसके बाद पंचायत चुनाव की आचार संहिता के चलते भर्ती प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जा सका।

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शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों एवं कर्मचारियों के विभिन्न पदों पर लटकी भर्ती को पूरा करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन से अनुमोदन मांगा गया था। शासन की ओर से प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे को भेजा गया था।

शिक्षा मंत्री के मुताबिक शुक्रवार को इस पर अनुमोदन दे दिया गया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि भर्ती केवल उन पदों पर होगी, जिन पदों पर इसकी प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन इसे पूरा नहीं किया जा सका था। 

जुगरान के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री से मिले अभ्यर्थी
राज्य युवा कल्याण परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष रविंद्र जुगरान के नेतृत्व में अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री से मिलकर शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भर्ती चयन प्रक्रिया पूरी करने की मांग की।
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शिक्षकों की कमी दूर करने को नया फार्मूला तैयार 

प्रदेश में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से नया फार्मूला तैयार किया गया है। अब किसी शिक्षक के सेवानिवृत्त होने से पहले ही संबंधित पद पर शिक्षक की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ताकि किसी शिक्षक के सेवानिवृत्त होते ही उसी दिन से नए भर्ती के शिक्षक को नियुक्ति दी जा सके। 

प्रदेश में शिक्षकों के चार हजार से अधिक पद खाली हैं। सरकार की ओर से इन पदों को भरने के लिए तमाम प्रयासों के बावजूद अब भी खासकर पहाड़ के दूरदराज के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी बनी है। पर्वतीय जनपदों में शिक्षकों के सृजित पदों पर 70 फीसदी भी शिक्षक नहीं हैं।

शिक्षा विभाग की ओर से प्रवक्ताओं एवं सहायक अध्यापक एलटी के रिक्त पदों को भरा जा सके, इसके लिए लोक सेवा आयोग एवं अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में अधियाचन किया गया, लेकिन आयोग से चयन प्रक्रिया में देरी से विभाग को शिक्षक नहीं मिल पाए हैं। जिसे देखते हुए विभाग की ओर से स्थायी नियुक्ति के शिक्षक मिलने तक रिक्त पदों पर अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

स्कूलों में प्रधानाचार्यों के स्तर से अतिथि शिक्षकों का चयन कर लिया गया था, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने से अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति का मामला भी लटका हुआ है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के मुताबिक, अब सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों का हर साल वार्षिक कैलेंडर जारी किया जाएगा। इसके माध्यम से यह देखा जाएगा कि किस जनपद में किस विषय का शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहा है। उस शिक्षक के सेवानिवृत्त होने से पहले ही उस पद को रिक्त मानते हुए उस पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।  
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