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रामनगर कांडः आत्मदाह करने वाले छात्र की दिल्ली में मौत

Tue, 11 Nov 2014 02:11 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के रामनगर में टंकी पर आत्मदाह का प्रयास करने वाले एनएसयूआई के कॉलेज अध्यक्ष रोहित पांडे की दिल्ली सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई।
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रोहित ने चार नवंबर को रामनगर में पानी की टंकी पर चढ़कर आत्मदाह करने का प्रयास किया था। रोहित को गंभीर हालत में दिल्ली रेफर किया गया था। रोहित कांड की गाज एसएसपी और डीएम पर गिर चुकी है।

सोमवार देर रात दिल्ली में रोहित की मौत के बाद रामनगर में भारी पुलिस फोर्स तैनात हो गया है। नए एसएसपी और डीएम मंगलवार सुबह से रामनगर में हैं।

एहतियातन डिग्री कॉलेज भी बंद कर दिए हैं। रामनगर बाजार सुनसान पड़ा है। रोहित का शव शाम तक रामनगर पहुंचने की संभावना है। इस दौरान लोगों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए भारी संख्या में फोर्स की तैनाती की गई है। दूसरे जिलों से फोर्स मंगवाई गई है।
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रोहित की मौत से गुस्साए एनएसयूआई के कार्यकर्ता देहरादून के सभी शिक्षण संस्थान बंद कराएंगे। सीएम हरीश रातव ने रामनगर कांड की सीबीसीआईडी जांच के आदेश दे दिए हैं।

नेताओं को खुश करने के लिए पुलिस पर मढ़ा दोष

ओमप्रकाश सती/ हल्द्वानी

रामनगर में हुए रोहित आत्मदाह कांड में हुड़दंग करने वाले भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। लेकिन राजनैतिक दबाव और छुटभैये नेताओं को खुश करने के लिए सरकार ने सारा दोष पुलिस प्रशासन पर मढ़ दिया।

सूत्रों की मानें तो असल खेल संजय को बचाने के लिए खेला गया था। उसने रोहित से करीब 40 मिनट पहले आत्मदाह का प्रयास किया था लेकिन आग लगने से पहले पुलिस ने उसे पकड़ लिया था।

संजय पर कार्रवाई के बाद टंकी पर चढ़े चारों लोगों तक आत्मदाह का प्रयास करने की सूचना पहुंचाई गई, ताकि पुलिस पर दबाव बनाकर संजय के खिलाफ कार्रवाई को रोका जा सके।

सूत्रों के अनुसार इसके लिए मूल रूप से दीप गुणवंत को तैयार किया गया था। उसे सफेद वास्कट पहनाकर टंकी पर चढ़ाया गया था ताकि वास्कट पर आग लगते ही उसे उतारकर फेंक दे। इससे वह बच भी जाए और काम भी हो जाए।
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रोहित ने आत्मदाह किया या उसे आग लगाई?

चार नवंबर को दीप गुणवंत ने प्रयास भी किया लेकिन ऐन वक्त पर रोहित को अचानक आग लग गई और सारा प्लान चौपट हो गया। हालांकि अभी जांच चल रही है कि रोहित ने आत्मदाह किया या उसे आग लगाई गई।

इधर, इस मामले में हुड़दंग करने वालों ने टंकी पर चढ़े चारों युवकों पर कार्रवाई से पुलिस को रोका और टंकी की सीढ़ियां घेर लीं। रोहित की आग बुझाते समय भी फायरकर्मियों से पाइप छीनने की कोशिश की गई, जिसमें करीब 10 सेकेंड बर्बाद हुए।

नहीं तो रोहित 20 से 25 प्रतिशत ही झुलसता। मामले की गंभीरता को देखते हुए रोहित के आत्मदाह से पहले ही कोतवाल को हटाए जाने का आश्वासन भी दे दिया गया था।

लेकिन इसकी सूचना टंकी पर चढ़े चारों एनएसयूआई कार्यकर्ताओं तक नहीं पहुंचने दी गई और मामला आज हमारे सामने है।
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