प्राकृतिक संसाधनों के तेजी से हो रहे दोहन से लगातार बढ़ रहा प्रदूषण देश भर में चिंता का सबब बना हुआ है। ऐसा ही कुछ हाल अपने शहर काशीपुर का भी है।
पर अच्छी बात यह है कि शहर के प्रदूषण से निपटने के लिए यहां पहल की जा रही है। यदि सब कुछ ठाक रहा तो काशीपुर शहर स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त हो जाएगा। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कई बिंदुओं को शामिल करते हुए केंद्र सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजा है। राज्य में देहरादून और हरिद्वार के बाद इस तरह का प्लान भेजने वाला काशीपुर तीसरा शहर है।
पिछले कुछ साल में तराई में औद्योगिक विकास तेजी से हुआ है और इसके चलते बसासत का ग्राफ भी बढ़ा है। औद्योगिक विकास और बसासत के लिए अंधाधुंध पेड़ों का कटान होता चला गया, जिससे कंक्रीट का जंगल तो बढ़ा ही, साथ ही वाहनों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ। इसके अलावा फैक्ट्रियों का प्रदूषण अलग बढ़ रहा है। वर्तमान में स्थिति यह है कि जिले में प्रदूषण मानक से दोगुना हो गया। ऐसे में शहरों को प्रदूषण से बचाने के लिए प्लान तैयार किया जाना आवश्यक हो गया है। काशीपुर को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने के लिए पीसीबी ने केंद्र सरकार के निर्देशानुसार एक प्लान बनाकर मुख्यालय के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा है।
इसमें प्रदूषण के कारकों को बिंदुवार अंकित कर इनके निदान के संबंध में क्रमवार सुझाव दिए गए हैं। पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. अंकुर कंसल ने बताया काशीपुर में वर्ष 2018 तक करीब 22 हजार वाहन पंजीकृत हैं। 18 बड़ी इंडस्ट्री और कुछ ईंट भट्ठे हैं। जनवरी, फरवरी, मई और दिसंबर इन चार महीनों में सबसे अधिक प्रदूषण होता है। केंद्र सरकार को भेजे गए प्लान को यदि स्वीकृति मिल जाती है तो निश्चित रूप से काशीपुर का प्रदूषण कम करने में सहायता मिलेगी।
प्लान में दिए गए यातायात के लिए सुझाव
1. 15 साल पुराने डीजल वाहनों को वर्ष 2020 तक बाहर किया जाए।
2. सीएनजी युक्त यात्री वाहन चलाए जाएं।
3. डीजल वाले ऑटो हटाकर नया पंजीकरण न किया जाए।
4. मल्टी लेयर पार्किंग की व्यवस्था की जाए।
नगर निगम के लिए दिए गए सुझाव
1. सड़कों की आधुनिक मशीनों से सफाई हो।
2. शहर में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के साफ पानी से सड़कों पर छिड़काव हो, ताकि भूजल की बर्बादी न हो।
3. निगम क्षेत्र में पार्क बनाए जाएं।
4. कचरे को खुले में न जलाया जाए।
5. सॉलिड वेस्ट को ढककर कर ले जाया जाए।
निर्माण के संबंध में सुझाव
1. भवन या अन्य बड़े निर्माण के दौरान निर्माण क्षेत्र में कार्य के दौरान चारों तरफ से ढका जाए।
2. हाइवे पर निर्माण सामग्री न रखी जाए।
3. ध्वनि और वायु प्रदूषण फैलाने वाले जनरेटर पूर्णतया बंद किए जाएं।
कोयले से संबंधित सुझाव
1. ढाबों में लड़की और कोयले का इस्तेमाल बंद किया जाए।
2. इंडस्ट्री में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल की इजाजत न दी जाए।
3. पेटको (हानिकारक गैस उत्सर्जन अधिक) कोयले पर प्रतिबंध किया जाए।
4. काशीपुर में एक ऑनलाइन एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग स्टेशन की स्थापना की जाए।