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उत्तराखंड: पर्वतीय सीमांत क्षेत्रों में उद्योग लगाने पर जीएसटी में 100 फीसदी तक छूट

Wed, 06 Jun 2018 01:57 PM IST
अंकुर शर्मा, अमर उजाला, हल्द्वानी
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GST
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उद्योग नीति में संशोधन करते हुए प्रदेश सरकार ने पर्वतीय और सीमांत जिलों से पलायन रोकने के लिए उद्योगों को जीएसटी में सौ फीसदी राहत की घोषणा की है। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है।

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सरकार की ओर से जारी संशोधन नीति में पर्वतीय और सीमांत जिलों के उद्योगों को राज्य में बिक्री के लिए प्रोत्साहन दिया गया है। इस नीति के मुताबिक यदि उद्योग राज्य में उत्पादन कर राज्य में ही बिक्री करते हैं तो बिक्री पर लगने वाले देय जीएसटी में 100 फीसदी तक छूट मिलेगी। इस कर में राहत के पीछे सीमांत क्षेत्रों में उद्यमों को बढ़ावा देना और उद्यमियों को उत्पादित माल राज्य में ही खपाने के लिए प्रेरित करना है। यह सहूलियत 31 मार्च 2025 तक दी गई है। इस बाबत औद्योगिक विकास विभाग ने शासनादेश भी जारी कर दिया है।

श्रेणी और जिले
ए श्रेणी के जिले :  पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली, चंपावत, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर।
बी श्रेणी के जिले : अल्मोड़ा, पौड़ी टिहरी के पर्वतीय क्षेत्र, नैनीताल और देहरादून के  पर्वतीय इलाके
 बी + श्रेणी के क्षेत्र : कोटद्वार, सिगड्डी से जुड़े क्षेत्र, ढालवाला, मुनीकीरेती, तपोवन से जुड़े मैदानी क्षेत्र, नैनीताल का कोटाबाग, देहरादून का कालसी क्षेत्र।
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ए को 90 और बी, बी + को मिलेगी 75 फीसदी की प्रतिपूर्ति।

ए श्रेणी जिले में उद्यम लगाने पर पांच साल तक छूट
 ए श्रेणी के जिले में उद्यम स्थापित कर उत्पादन को राज्य में बिक्री करने पर पांच सालों तक शुद्ध जीएसटी में 100 फीसदी प्रतिपूर्ति सरकार करेगी। पांच साल बाद 90 फीसदी तक की प्रतिपूर्ति की जाएगी। इसी तरह बी और बी + श्रेणी के जिले में पांच साल तक उद्यमी को शुद्ध देय जीएसटी में 100 फीसदी और पांच साल बाद 75 फीसदी की प्रतिपूर्ति की जाएगी।

ये होंगे फायदे
जीएसटी में छूट होने से राज्य में उद्यम बढ़ेगा, पलायन रुकेगा
प्रदेश के उपभोक्ताओं को सस्ता मिलेगा सामान
उत्पादन और बिक्री राज्य में ही होने पर राजस्व राज्य में ही रहेगा

उद्यमी से उद्यमी को बेचने पर नहीं मिलेगा फायदा
इस सुविधा का लाभ सिर्फ उन्हीं उद्यमियों को मिलेगा जो उत्पाद को सीधे ग्राहक को बेचेंगे। यदि उद्यमी अपने उत्पाद को उद्यमी को बेचता है तो जीएसटी में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी।

इस तरह करेंगे प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन
आवेदनकर्ता जिला उद्योग केंद्र का उपादान पंजीयन, उद्योग आधार पंजीयन, जीएसटी पंजीयन, बिक्री का राज्य कर विभाग से सत्यापित ब्योरा, जमा कर की रसीद वगैरह जिला उद्योग केंद्र में जमा करेगा। विभाग इसका सत्यापित करने के बाद श्रेणी के अनुसार प्रतिपूर्ति आवेदनकर्ता के खाते में हस्तांतरित करेगा।
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ए, बी, बी+ श्रेणी के इलाकों के लिए उत्पादन और बिक्री पर शुरूआत में शत प्रतिशत, फिर 75-90 प्रतिशत तक की प्रतिपूर्ति मिलेगी।
- योगेश चंद्र पांडे, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र

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