देहरादून स्थित मंडी में सब्जियों की आवक अच्छी है और कीमत भी गिर गई है, लेकिन फिर भी तरकारी ने आम आदमी की पहुंच से दूर हो रही है।
मासाखोर से सब्जी खरीदना ज्यादा पसंद
इसकी एक सीधी मासाखोर बने हुए हैं। वह क्वालिटी के नाम पर फुटकर वालों को महंगा बेच रहे हैं, फुटकर वाले इस अधिक भुगतान को जनता की जेब से निकलवा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि मंडी में फुटकर वालों को थोक व्यापारी क्रेट में निमभन क्वालिटी की सब्जी सजा बेचते हैं।
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इनके भाव फुटकर वालों को मार्केट में अच्छे नहीं मिलते, लिहाजा वह मासाखोर से सब्जी खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं। मासाखोर थोक व्यापारी और फुटकर विक्रेता के बीच की कड़ी है। यह अक्सर थोक में सब्जी खरीद मंडी में ही फुटकर वालों को बेचने का काम करता है।
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यहां से सब्जी खरीदने का फायदा फुटकर वाले को यह होता है कि वह एक-दो रुपये अधिक देकर अच्छी क्वालिटी की सब्जी हासिल करता है। बस यही एक-दो रुपये का अतिरिक्त भुगतान बाद में ग्राहक की जेब से पांच से 10 रुपए अधिक के रूप में निकवाया जाता है।
यूं रही अन्य सब्जियों की आवक और कीमत
सब्जी - आवक - दाम
गोभी - 462 - 12-25
करेला - 34 - 18-30
लौकी - 34 - 12-16
गाजर - 84 - 15-20
मटर - 286 - 15-34
शिमला मिर्च - 30 - 15-30
फरासबीन - 34 - 20-35
अरवी - 33 - 27-35
बैंगन - 134 - 8-14
(आवक क्विंटल में और दाम थोक के प्रति किलो रुपए में हैं, जो निरंजनपुर मंडी से लिए गए हैं)
यहां तो कोई नहीं बेचता तय मूल्य पर
मंडी में सब्जी, फलों का थोक मूल्य बेशक तय हो, लेकिन इस दर पर मंडी में खरीदारों को भी सब्जी फल हासिल नहीं होते। इसकी वजह यह कि कृत्रिम कमी जताकर भाव बढ़ाया जाता है और ग्राहक की जेब से अधिक वसूला जाता है।
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