राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश कार्यकारी महामंत्री अरुण पांडेय कहते हैं, केंद्र ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत परिवार नियोजन भत्ता समाप्त किया और यूपी और उत्तराखंड राज्यों की सरकारों ने इसका अनुसरण करते हुए इसे समाप्त कर दिया। परिवार नियोजन भत्ते के तौर पर कर्मचारियों को ग्रेड पे का 10 प्रतिशत दिया जाता था।
राष्ट्रहित में जो भी कानून जरूरी है, उसे लागू करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। पूरी दुनिया में जहां भी अच्छे कानून हैं, दूसरे मुल्क उन्हें अपनाते हैं।
- मदन कौशिक, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
उत्तराखंड में जनसंख्या नियंत्रण कानून की आवश्यकता नहीं है। ये भाजपा की ध्रुवीकरण की राजनीति है। इसके लिए भाजपा यह नया राग को छेड़ रही है। उसे महंगाई, बेरोजगारी, खराब स्वास्थ्य सिस्टम की चिंता करनी चाहिए।
- सूर्यकांत धस्माना, प्रदेश उपाध्यक्ष, कांग्रेस
जनसंख्या नियंत्रण की जिम्मेदारी
सिर्फ त्रिस्तरीय पंचायतों या शहरी निकायों की ही क्यों होनी चाहिए। इसके दायरे विधायिका को क्यों नहीं आना चाहिए? लेकिन यह विषय राज्य का नहीं केंद्र का है।
-जोत सिंह बिष्ट, पंचायती राज मामलों के जानकार