उत्तराखंड में पॉलीहाउस की सब्सिडी में मंत्रियों और वरिष्ठ अफसरों ने तो बंदरबांट की ही, विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से कई अन्य लोगों ने भी लाखों डकार गए।
जिले के चकराता ब्लाक में 30 से अधिक मामले बताए जा रहे हैं। इन लोगों ने सब्सिडी तो ली लेकिन पॉलीहाउस नहीं बनाए। केवल फाइलों में काम पूरा कर लिया गया है।
वहीं, रायपुर और सहसपुर ब्लाक में एक-एक पुराने पॉलीहाउस को नया दिखाकर सब्सिडी लेने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक सत्यापन किया गया तो संबंधित अफसरों पर गाज गिर सकती है।
फर्जी किसानों को अनुदान
जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान की ओर से वर्ष 2008 में जड़ी बूटी के कृषिकरण के लिए 275 किसानों को चयनित किया गया था। इनमें से कुछ किसानों को अलग-अलग हजारों रुपये के चेक भेजे गए। बाद में जांच में पता चला कि पौड़ी, हरिद्वार, देहरादून और नैनीताल के जिन किसानों को चेक भेजे गए, उन पतों पर कोई रहता ही नहीं था। मामले में दोषी अफसरों पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।
मंत्री को तीन, आम को एक नहीं
कैबिनेट मंत्री अमृता रावत के परिवार को कुछ ही समय में तीन पॉलीहाउस मिल गए, जबकि आम किसान वर्षों से सब्सिडी के लिए एड़ियां घिस रहे हैं। केदारावाला के निवर्तमान प्रधान गुलफाम अली बताते हैं कि डेढ़ साल पहले पॉलीहाउस के लिए आवेदन किया था, लेकिन इसे अब तक मंजूरी नहीं मिली। रायपुर ब्लॉक एक महिला किसान को सब्सिडी के लिए एक साल इंतजार करना पड़ा।
जांच हो तो नपेंगे कई
प्रदेश में लगभग छह सौ किसानों के प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से मंजूरी मिली है। कुछ किसानों ने बागवानी बोर्ड से मंजूर पुराने प्रोजेक्ट को नया दिखाकर हॉल्टीकल्चर मिशन की सब्सिडी का लाभ लिया है। बोर्ड और मिशन दोनों के पॉलीहाउस निर्माण की जांच हो तो कई अफसर नप सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि जांच में मंत्री और अफसरों के कारनामे सामने आएंगे।
नुकसान पर पांच लाख की मदद
प्रदेश में सैकड़ों किसान ऐसे हैं, जिन्हें पॉलीहाउस बनाने के लिए अनुदान नहीं मिल पा रहा है। वहीं, सरकार अपने लोगों पर किस कदर मेहरबान है, यह विकासनगर ब्लॉक में देखा जा सकता है। यहां कांग्रेस नेता के पॉलीहाउस में नुकसान पर पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। बाढ़ से पॉलीहाउस को नुकसान दिखाकर पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से 21 नवंबर 2013 को यह धनराशि जारी की है।