चार धाम मार्ग पुनर्निर्माण पर बनी अनिश्चितता की स्थिति अब न केवल सरकार बल्कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) पर भी भारी पड़ती दिख रही है। यह हाल तब है जबकि आपदा आए करीब सात माह बीत चुके हैं।
बीती आठ फरवरी को हुई बैठक में बीआरओ को अब 15 अप्रैल तक चारधाम यात्रा मार्ग के पुनर्निर्माण का लक्ष्य दिया जा चुका है। पहले यही काम बीआरओ को 30 अप्रैल तक करना था।
बीआरओ के उच्च अधिकारी मौजूद
हरिद्वार में हुई इस बैठक में केंद्रीय भूतल परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री आस्कर फर्नांडीस और मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ ही बीआरओ के उच्च अधिकारी भी मौजूद थे।
चार धाम मार्ग पुनर्निर्माण के लिए बीआरओ की डेडलाइन को 15 दिन कम करने के पीछे वजह लोकसभा चुनाव को भी माना जा रहा है। सरकार ने चुनाव के चलते डेडलाइन तो कम कर दी, पर समस्याएं नहीं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बीआरओ इस काम को तय समय में पूरा कर पाएगा।
खामियाजा संगठन झेल रहा है
सवाल इसलिए भी है क्योंकि संगठन को अब तक केंद्र से निर्माण संबंधी स्वीकृतियां ही नहीं मिली हैं। आपदा के दौरान बिना स्वीकृति लिए मजदूरों को तैनात करने का खामियाजा संगठन झेल रहा है। संगठन के वित्त विभाग के अड़ंगे से मजदूरों का वेतन भुगतान लटका है।
क्षतिग्रस्त सड़कें बनाने पर मंथन
इसके अलावा आपदा के बाद राज्य सरकार पहले लोक निर्माण विभाग से ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग और ऋषिकेश से उत्तरकाशी की क्षतिग्रस्त सड़कें बनाने पर मंथन करती रही। दिसंबर 2013 तक सीएम सहित मंत्री, विधायक बीआरओ को कोसते दिखे। बीआरओ को रोड़ी पत्थर के लाले पड़ गए और मंहगे दामों पर सामग्री उठानी पड़ी।
राज्य लोनिवि से कार्य करवाने की योजना फेल हुई तो फिर सरकार ने बीआरओ को जिम्मा सौंपने का फैसला लिया। इसके चलते चार धाम सड़क मार्ग के प्रस्ताव नहीं बन पाए। बीआरओ ने केवल सीमांत सड़कों के प्रस्ताव ही केंद्र को भेजे थे, जिस पर स्वीकृति भी मिल गई। बताया गया है कि बीती आठ फरवरी को हुई बैठक के बाद चारधाम मार्गों के प्रस्ताव केंद्र को भेजे गए हैं। इस पर 24 फरवरी को दिल्ली में बैठक में फैसला हो सकता है।
स्वीकृति बिना कार्य शुरू होना संभव नहीं
- आठ फरवरी को बीआरओ से कार्य करवाने की बनी सहमति के बाद ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी मार्ग की डीपीआर बनाई गई है।
केंद्र को प्रस्ताव भेजे गए हैं, जिनपर 24 फरवरी को बीआरओ और केंद्रीय भूतल परिवहन एवं हाईवे के उच्च अधिकारियों की दिल्ली में बैठक है। जब तक बीआरओ के प्रस्ताव केंद्र से स्वीकृत नहीं होते निर्माण कार्य शुरू होना संभव नहीं है।
मजदूरों का जल्द होगा भुगतान
- आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों से मलबा हटाने और अन्य कार्यों के लिए जिन मजदूरों से काम लिया गया उनका वेतन भुगतान नहीं हुआ है। दरअसल, बीआरओ ने आपदा की स्थिति देखते हुए तुरंत मजदूरों को तैनात कर दिया था, स्वीकृति नहीं ली गई।
अब बीआरओ के अकाउंट्स विभाग ने स्वीकृति के अभाव में मजदूरों का भुगतान रोक लगा है। बीआरओ के प्रोजेक्ट शिवालिक के चीफ इंजीनियर केके राजदान ने बताया कि भुगतान की स्वीकृति मिल गई है, जल्द मजदूरों का बकाया भुगतान कर दिया जाएगा।