बच्चे को भी हेलमेट पहनाकर चलने पर ग्रेट पापा के अवार्ड से नवाजते एसपी ट्रैफिक गुंज्याल
- फोटो : फाइल फोटो
दुपहिया वाहन पर दूसरी सवारी को भी हेलमेट की अनिवार्यता पर हर बार की तरह फिर राजनीति शुरू हो गई है। इससे पहले भी हेलमेट अनिवार्य करने के संबंध में जब भी आदेश हुआ तो नेताओं के विरोध के कारण ठंडे बस्ते में चला गया। दूसरी सवारी का शासनादेश जारी होते ही विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं।
विधायक राजकुमार ने मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिलकर शहरी क्षेत्र में दूसरी सवारी के लिए हेलमेट अनिवार्यता पर रोक लगाए जाने की मांग की। उम्मीद है कि शहरी क्षेत्र में शासनादेश पर रोक लग जाएगी, लेकिन प्रदेश यह लागू रहेगा। इस संबंध में विभागीय अफसरों ने किसी जानकारी से मना किया है। विधायक राजकुमार का तर्क है कि शहरी क्षेत्र में वैसे ही यातायात धीमा रहता है। कई स्थानों पर जाम की स्थिति रहती है।
ऐसे में अगर कोई व्यक्ति बीमार बुजुर्ग को अस्पताल ले जा रहा है तो उसे दूसरी सवारी को हेलमेट की अनिवार्यता से दिक्कत होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री रावत ने उन्हें आश्वासन दिया है कि शहरी क्षेत्र में दूसरी सवारी को हेलमेट की अनिवार्यता के आदेश पर रोक लगेगी। विधायक ने कहा कि हाईवे पर आदेश लागू रहेगा। इस संबंध में विधायक के कैंप कार्यालय पर बैठक भी हुई थी। कांग्रेस पूर्व महानगर अध्यक्ष लाल चंद शर्मा, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष अशोक वर्मा और क्षेत्रीय पार्षदों ने शासनादेश का एक स्वर में विरोध किया है। उधर, इस संबंध में परिवहन सचिव सीएस नपल्च्याल ने किसी भी जानकारी से मना किया।
चालान का नियम तो बना, तरीका नहीं
traffic police
- फोटो : Amar Ujala
पहली बार चालान होने पर 100 रुपये जुर्माना, दूसरी बार पकड़े जाने पर 300 रुपये जुर्माना और तीसरे बार पकड़े जाने पर ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने का शासन ने निर्देश तो दे दिए, लेकिन पता कै से चलेगा कि बाइक सवार दूसरी बार पकड़ा जा रहा है या तीसरी बार इसका तरीका न तो शासन के पास है और न विभाग ने बनाया है। इस पर माथापच्ची की जा रही है कि आरसी पर पंच किया जाए या डाई लगाई जाए, जिससे समस्या का समाधान निकले।
परिवहन विभाग ने वाहनों के चालान के संबंध में सख्ती बरतने के आदेश कर दिए हैं। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस इस मामले में परेशान है कि दूसरे और तीसरे चालान का निर्णय कैसे करें। यह मामला लोगों के आरसी और दूसरे कागजात लेमीनेटेड कराने से और पेचीदा हो रहा है। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस का सिस्टम पूरी तरह कंप्यूटरीकृत नहीं होने से भी दिक्कत आ रही है। चालान होने वाले वाहनों का आंकड़ा ऑनलाइन नहीं हुआ है। अगर यह आंकड़ा ऑनलाइन होता तो वाहन का नंबर फीड करते ही स्थिति स्क्रीन पर आ जाती।
सचिव परिवहन सीएस नपल्च्याल ने अधिकारियों से ऐसी डाई की व्यवस्था करने के लिए कहा है जिससे आरसी और वाहन से संबंधित कागज पर निशान लगा दिया जाए। जब वाहन का चालान हो तो निशान देखें अगर पहले से निशान लगा हो तो 300 रुपये जुर्माना राशि लगाई जाए। ट्रैफिक पुलिस कागजात पर पंच मार्क लगाने की योजना बना रही है। यह भी योजना बनाई जा रही है कि चालान किए जाने वाले वाहनों का डीटेल नोट करके कंप्यूटर में फीड कर दिया जाए। इससे डाटा बैंक तैयार हो जाएगा।