राज्य में नागरिक सेवाओं पर रहा है फोकस
उत्तराखंड सरकार सरकारी तंत्र को नागरिक सेवाओं के प्रति जवाबदेह बनाने को लेकर काम कर रही है। 2011 में तत्कालीन खंडूड़ी सरकार ने सेवा का अधिकार कानून बनाया। इस कानून के तहत करीब 300 सरकारी सेवाओं को समय पर उपलब्ध कराने के लिए सरकारी महकमों को उत्तरदायी बनाया गया है। इसके अलावा अपणि सरकार पोर्टल भी शुरू किया गया है, जिसमें सरकारी सेवाओं को लेकर नागरिक ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं, जिनके समाधान के लिए एक समयसीमा और स्तर तय किए गए हैं। नागरिक सेवाओं को सर्वसुलभ बनाने के लिए सुधार की काफी गुंजाइश है। विभागों के बीच में समन्यव की कमी के कारण नगारिक सुुविधाओं से जुड़ी योजनाएं प्रभावी नहीं हो पा रही हैं।
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पीएमओ के दखल से अब सुधार के आसार
प्रधानमंत्री कार्यालय की दखल के बाद अब ईज ऑफ लीविंग के जरिये नागरिकों की सेवाओं को सरल और जनसुलभ बनाने में मदद मिलेगी। मुख्य सचिव ने उच्चाधिकारियों को ताकीद किया है कि वे विभागीय स्तर पर ईज ऑफ लीविंग की एसओपी तैयार कराएं। उद्योग विभाग के पीएमयू को एसओपी बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग एक ईज ऑफ लीविंग की वेबसाइट तैयार कराएगा, जिसके माध्यम से जनता को सरकारी सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। सभी विभागों को सेवाओं से जुड़ी सूची सौंपी गई हैं, जिन्हें उन्हें सर्वसुलभ बनाना है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने ईज ऑफ लीविंग के दृष्टिगत नागरिकोन्मुखी सेवाओं व प्रमाणपत्रों को सरल एवं सुलभ बनाए जाने की अपेक्षा की है। मुख्य सचिव के स्तर पर इस बारे में दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इस पर काम शुरू हो गया है। -अरुणेंद्र सिंह चौहान, अपर सचिव, कार्मिक एवं सतर्कता