राजधानी देहरादून देश का ऐसा पहला शहर बनने जा रहा है जहां सड़क पर नहीं बल्कि डिवाइडर पर भी कारें दौड़ेंगी। इससे राजधानी में तेजी से बढ़ती ट्रैफिक की समस्या से भी जल्द ही छुटकारा मिलेगा।
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) पर्सनलरैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (पीआरटीएस) के तहत दून में रैपिड कार चलाने जा रहा है। इसके लिए योजना की डीपीआर तैयार हो चुकी है।
मार्च में मंजूरी के बाद अप्रैल से योजना पर काम शुरू हो जाएगा। एमडीडीए उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक पूरा काम पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर होगा। डीपीआर फरवरी अंत तक शासन में जमा कर देंगे। तीन चरणों में मंजूरी के बाद अप्रैल में टेंडर जारी हो जाएंगे।
जानिए, कैसे काम करता है पीआरटीएस
इस योजना में सड़क के बीचों बीच डिवाइडर से करीब दस मीटर ऊपर ट्रैक बनेगा। हर 100 मीटर पर एक प्लेटफार्म होगा। ट्रैक पर ट्रॉली की तरह दिखने वाली कार दौड़ेगी। एक कार में 10 से 15 यात्री बैठ सकेंगे। जिसका संचालन लिफ्ट की तरह बटन से होगा। यात्रियों को खुद इसे संचालित करना होगा। टिकट प्लेटफार्म पर वेंडिंग मशीन से मिलेगा।
यह होगा रूट
रैपिड कार का ट्रैक आईएसबीटी से शुरू होगा। इसके बाद कार सहारनपुर चौक, प्रिंस चौक, दर्शनलाल चौक, घंटाघर होते राजपुर रोड स्थित साईं मंदिर तक जाएगी।
दून के लिए इसलिए मुफीद
पीआरटीएस शहर के लिए पूरी तरह मुफीद है। डिवाइडर के ऊपर चलने के कारण इसमें भूमि अधिग्रहण की जरूरत नहीं है। बनावट ऐसी है, जिससे योजना का खर्च मेट्रो या मोनो ट्रेन से कम आएगा। यह देश के अन्य अधिक जनसंख्या घनत्व वाले शहरों में कारगर साबित हो सकती है। रैपिड कार सिंगापुर, मलयेशिया समेत यूरोप के कई शहरों में चल रही है।