मनेरी बांध की सुरंग से सिंचाई पेयजल स्रोत गंवाने वाले सिरोर गांव के कई परिवार 38 साल बाद भी पीने के पानी के लिए भागीरथी नदी के पानी पर ही निर्भर हैं।
पिछले वर्ष जून की आपदा से बेघर हुए कई परिवारों को पीने के लिए ही नहीं बल्कि नए घर बनाने के लिए भी एक किमी दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।
सुरंग निर्माण में स्रोत खत्म
सिरोर गांव से होकर गुजर रही मनेरी भाली प्रथम चरण परियोजना की सुरंग के निर्माण के दौरान किए गए डायनामाइट के धमाकों से गांव के सिंचाई, पनचक्की और पेयजल के स्रोत खत्म हो गए थे।
गांव में खेतों की सिंचाई के लिए तो दूर सरकार अभी तक पेयजल का इंतजाम भी नहीं कर पाई। 26 साल पहले गांव से आठ किमी दूर से जल संस्थान ने एक पेयजल योजना तैयार तो की, लेकिन इसमें भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया।
आपदा में पीने का पानी भी छिना
गांव से कुछ दूरी पर कुछ लोगों की निजी पेयजल योजना का स्रोत इस वर्ष जून की आपदा में नष्ट हो गया। गांव के करीब 18 परिवार अब पीने के पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
गांव की गुलाबी देवी, बलमा, कुसुम, रेखा, त्रेपनी देवी, संतोषी आदि महिलाओं ने डीएम को समस्या से अवगत कराया। डीएम ने जल संस्थान के ईई को पेयजल से वंचित परिवारों के लिए पानी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।