कोरोना संक्रमण दर कम होने के बावजूद रुके हुए ऑपरेशन में तेजी नहीं आ पा रही है। इससे मरीजों को खासी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में कई मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगे खर्च पर ऑपरेशन कराने पड़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अभी कोरोना की संक्रमण दर धीमी हैं, इसलिए आगे की तैयारियों से निपटने और पुराने अटके ऑपरेशन व अन्य बीमारियों के मरीजों का इस वक्त उपचार कर दिया जाना चाहिए। राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीजों के ऑपरेशन लंबित हैं। एक अनुमान के मुताबिक 600 से अधिक मरीजों के छोटे-बड़े ऑपरेशन अभी होने बाकी थे।
इनमें से भी कुछ ने दूसरे सरकारी या निजी अस्पतालों में ऑपरेशन करा लिए। जानकारों के मुताबिक कोरोना की तीसरी लहर कभी भी आ सकती है। ऐसे में राजकीय दून मेडिकल अस्पताल को एक बार फिर पूरी तरह से कोविड अस्पताल के रूप में तब्दील करना पड़ सकता है।
दून अस्पताल में पिछले एक हफ्ते पहले सामान्य मरीजों के ऑपरेशन शुरू हुए थे। हालांकि, अभी अस्पताल में रोजाना औसतन चार मरीजों के ही ऑपरेशन हो पा रहे हैं। दून अस्पताल में चूंकि अन्य सरकारी अस्पतालों की अपेक्षा आधुनिक मशीनें हैं और गंभीर मरीजों के ऑपरेशन भी होते हैं, इसलिए कोविड की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए ऑपरेशन की संख्या में गति लाने जरूरत है।
स्वास्थ्य मंत्री के दौरे के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनसिंह रावत के औचक निरीक्षण के बाद भी दून अस्पताल में न तो डॉक्टरों व कर्मचारियों के रवैए में सुधार आ रहा है और न उन पर चेतावनी का असर हो रहा है। निरीक्षण में ड्यूटी से गायब मिले डॉक्टरों और अव्यवस्थाओं पर चिकित्सा अधीक्षक संबंधित विभागाध्यक्षों से जवाब तलब करने के अलावा चेतावनी भी दे चुके हैं।
प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना भी कई बार सख्त कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं, इसके बावजूद स्थिति जस की तस है। महिला विंग में तो कुछ मरीजों को भोजन के लिए भी अनुबंधित कैंटीन तक सूचना नहीं पहुंचाई जा रही है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केसी पंत ने इस प्रवृत्ति को गंभीरता से लेने और सख्त कार्रवाई की बात कही है।