बच्चों के शारीरिक-मानसिक विकास में उच्चस्तरीय परिणाम देने का दावा करने करने वाले दो नामी उत्पाद काम्प्लॉन और पीडियाश्योर के नमूने सैंपल लैब में फेल हो गए।
एडीएम कोर्ट हरिद्वार ने दोनों की निर्माता कंपनियों और विक्रेताओं पर दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही कोर्ट ने इनकी पैकिंग पर लिखे झूठे स्लोगनों को मिटाकर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के रुड़की तहसील अधिकारी दिलीप जैन ने 13 फरवरी 2013 को रुड़की के इजी-डे स्टोर से दो उत्पादों के सैंपल लिए थे। इनमें एक अबॉट हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड मुंबई के पीडियाश्योर और दूसरा हैंज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड मुंबई के काम्प्लॉन मेमोरी चार्जर का था। इन पर बच्चों के विकास के स्लोगन अंकित किए हुए थे।
कंपनी के साथ विक्रेता पर भी जुर्माना
इन स्लोगन की पुष्टि के लिए पीडियाश्योर का सैंपल पुणे लैब और काम्प्लॉन का सैंपल रुद्रपुर लैब भेजा गया। लैब की जांच में दोनों ही उत्पादों में ऐसे किसी तत्व का होना नहीं पाया गया जैसा दावा किया गया था। पीडियाश्योर पर अंकित प्रोटीन 14.10 प्रतिशत के मुकाबले 12.01 प्रतिशत मिला।
जांच में दोनों के सैंपल फेल पाए जाने पर 16 मई 2013 को एडीएम कोर्ट हरिद्वार में वाद दायर किया गया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना और कंपनियों के दावे को असत्य पाया।
इस पर कोर्ट ने पीडियाश्योर की कंपनी पर 5.25 लाख रुपये और काम्प्लॉन की कंपनी पर 3.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जबकि विक्रेता स्टोर के टीम लीडर देवाशीष मोहंती, नामिनी मुकेश रावल, सप्लायर भारतीय वाल मार्ट पटियाला, पंजाब को दोषी मानते हुए तीनों पर दोनों प्रोडक्ट को बेचने पर अलग-अलग 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
कुल मिलाकर दस लाख का ठोंका जुर्माना
दोनों कंपनियों और इनका प्रोडक्ट बेचने वालों पर कुल 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना राजस्व विभाग में जमा करवाना होगा।
यह दावा दर्ज था पैकिंग पर
खाद्य सुरक्षा अधिकारी महिमानंद जोशी ने बताया कि पीडियाश्योर की पैकिंग पर अंकित था कि 35 बीमारी वाले दिनों में 29 प्रतिशत की कटौती होगी। दिमाग के विकास में सहयोगी और एक्स्ट्रा एनर्जी देगी।
कॉम्प्लान पर बच्चों की याददाश्त बढ़ाने में कारगर, अतिरिक्त ऊर्जा का संचार आदि अंकित था। भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक के अनुसार कोई भी अप्रूवल नहीं था और किसी रिसर्च लैब की रिपोर्ट भी नहीं थी।