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Pauri News: गुलदार की दहशत, अकेले निकलने में डर रहीं महिलाएं व बच्चे, स्कूलों में दो दिन की छुट्टी घोषित

Tue, 24 Sep 2024 09:49 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार (पौड़ी)

सार

Pauri News: मंगलवार को द्वारीखाल ब्लॉक के ठांगर गांव में बीती 21 सितंबर की सुबह एक सात वर्षीय बच्चे कार्तिक पर गुलदार के हमले की घटना के बाद दहशत बनी हुई है।
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गुलदार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड के पौड़ी में द्वारीखाल ब्लॉक के अंतर्गत गुलदार प्रभावित गांव ठांगर में बच्चे पर हमले करने वाले गुलदार की मूवमेंट मंगलवार को उतिंडा गांव में नजर आई है। यहां उसने एक गाय और एक बछिया को घायल कर दिया। जिससे ग्रामीणों में दहशत बढ़ गई है।

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उतिंडा में दिन में ग्रामीणों को दो गुलदार नजर आए हैं। वन अधिकारियों का कहना है कि वनकर्मी क्षेत्र में लगातार गश्त कर रहे हैं। वहीं, डीएम आशीष चौहान ने गुलदार प्रभावित इलाकों में 25 व 26 सितंबर को दो दिन का अवकाश घोषित किया है। 

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मंगलवार को द्वारीखाल ब्लॉक के ठांगर गांव में बीती 21 सितंबर की सुबह एक सात वर्षीय बच्चे कार्तिक पर गुलदार के हमले की घटना के बाद दहशत बनी हुई है। मंगलवार दोपहर गुलदार ने पास के गांव उतिंडा के राजस्व ग्राम भेंडाखाल में एक गाय और एक बछिया को घायल कर दिया है। उतिंडा की ग्राम प्रधान सीमा देवी ने बताया कि गांव में दिन दहाडे़ दो गुलदार नजर आए हैं। गुलदार शोर मचाने पर भी नहीं डर रहे हैं। यहां पेड़ पर चढ़ने गुलदारों को देखकर लोगों में दहशत बनी रही। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम गांव में पहुंची। टीम क्षेत्र में गश्त कर रही है।

उधर, शैल शिल्पी विकास संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को गांव पहुंचकर प्रभावित परिवार से मुलाकात की और उन्हें 17100 की आर्थिक मदद प्रदान की। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विकास आर्य ने बताया कि कार्तिक के पिता मोहन सिंह और ताऊ कुलदीप सिंह गरीब परिवार के हैं और दूसरे की जमीन पर रह रहे हैं। उनका घर भी काफी खस्ताहाल है। उन्होंने शासन-प्रशासन और वन विभाग से प्रभावित परिवार को अविलंब मुआवजा देने की मांग की है। अन्य संगठनों के लोगों ने भी गांव में पीड़ित परिवार से मुलाकात की।

ग्राम पंचायत ठांगर की प्रधान सोनम देवी और समाज सेवी जितेंद्र सिंह ने बताया कि क्षेत्र में गुलदार की धमक बनी हुई है। दहशत के कारण महिलाएं भी खेत और जंगल में चारापत्ती तक लेने नहीं जा पा रही हैं। ग्रामीण दिन ढलते ही घरों में कैद हो जा रहे हैं। गांव में चारों ओर लैंटाना और गाजर घास की झाड़ियां होने के कारण गुलदार के हमले का खतरा बना हुआ है।
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