जल प्रलय के बाद आपदाग्रस्त क्षेत्रों में किस किस्म के वायरस-बैक्टीरिया हमलावर हुए इस राज पर परदा पड़ गया है। इन क्षेत्रों के मरीजों को स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी के लक्षणों के आधार पर दवाएं तो दीं लेकिन पैथोलोजिकल जांचें नहीं कराई।
इससे बीमारियों के संबंध में सही जानकारी नहीं मिल सकी। आपदाग्रस्त क्षेत्रों में विशेषज्ञों ने प्लेग और दूसरी बीमारियां फैलने की आशंका जाहिर की थी।
पैथोलोजिकल जांच नहीं हुई
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के लिहाज से आपदाग्रस्त क्षेत्रों में अब तक कुल 34 हजार 294 मरीज देखे गए। इनमें कुल एक हजार 243 मरीज भरती हुए। इन मरीजों में अधिकांश घायल रहे।
किसी के सिर पर चोट थी और किसी के हाथ-पैर टूटे थे। इनकी एक्सरे और दूसरी जांचें हो गईं। लेकिन जो बीमार थे उनमें किसी की पैथोलोजिकल जांचें नहीं हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग को इनमें एक भी व्यक्ति की बीमारी के बारे में सटीक जानकारी नहीं है।
आपदाग्रस्त क्षेत्रों में शुरुआत में स्वास्थ्य विभाग ने प्लेग और दूसरे रोग फैलने का अंदेशा जाहिर किया था। लेकिन जब रोग फैले तो इन्हें पहचानने के लिए कुछ नहीं किया गया। पहाड़ों पर फैली बीमारियों को लेकर केंद्र सरकार के संक्रामक रोग विशेषज्ञों की टीमें लगातार यहां आकर अध्ययन में जुटी हैं। नेशनल कम्युनिकेबिल डिजीज कं ट्रोल प्रोग्राम के विशेषज्ञों की टीम बृहस्पतिवार को फिर यहां आने वाली है।
विशेषज्ञ स्थिति को लेकर गंभीर
कोलकाता के विशेषज्ञों की टीम बुधवार को वापस चली गई। कार्यवाहक महानिदेशक चिकित्सा डा जेएस जोशी ने बताया कि इस वक्त 38 विशेषज्ञों की टीम पहाड़ पर है। सीजीएचएस के 40 विशेषज्ञ लखनऊ और कानपुर से यहां आए हैं। विशेषज्ञों की टीमें बराबर आपदाग्रस्त क्षेत्रों में बनी हुई हैं। उत्तराखंड का स्वास्थ्य विभाग भले ही यहां स्थिति सामान्य बताए लेकिन बाहर से आ रहे विशेषज्ञ यहां की स्थिति को लेकर बहुत गंभीर हैं।