आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को राहत देने के बजाय सरकार उनकी मुसीबत बढ़ने पर तुली है। ताज्जुब की बात है कि विकट हालातों में भी राज्य में केरोसिन का कोटा जून के मुकाबले 50 किलोलीटर कम कर दिया गया है।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सख्त जरूरत के बावजूद कोटे में बढ़ोतरी नहीं की गई है। इतना ही नहीं टिहरी और पौड़ी में तो कोटा कम कर दिया गया है।
केरोसिन की सख्त जरूरत
आपदा के बाद अंधेरे में डूबे गांवों में केरोसिन की सख्त जरूरत है। मिट्टी तेल खत्म न होने के बाद लोग चीड़ के छिलकों को जलाकर रोशनी कर रहे हैं। लोगों को उम्मीद थी कि इन हालातों को देखते हुए मिट्टी तेल का अतिरिक्त कोटा जारी किया जाएगा, लेकिन सरकार ने ऐसा करना जरूरी नहीं समझा। बुधवार को जुलाई, अगस्त व सितंबर महीने के लिए 2966 किलोलीटर प्रति माह का कोटा आवंटित किया गया।
जबकि अप्रैल, मई, जून में यह 3016 किलोलीटर प्रतिमाह था। साथ ही रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ जैसे आपदाप्रभावित जिलों का कोटा नहीं बढ़ाया गया है। वहीं, टिहरी के कोटे में 30 किलोलीटर और पौड़ी के कोटे में 20 किलोलीटर की कटौती जरूर कर दी गई है। शासनादेश के अनुसार बिना गैस कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को मैदानी क्षेत्र में 5 लीटर प्रति कार्ड और पहाड़ी जिलों में 7 लीटर केरोसिन प्रति कार्ड आवंटित किया जाएगा।
जिलावार कोटा
जिला - मासिक आवंटन(किलोलीटर में)
बागेश्वर 63
रुद्रप्रयाग 84
चंपावत 92
उत्तरकाशी 152
चमोली 174
टिहरी 174
पिथौरागढ़ 231
अल्मोड़ा 238
पौड़ी 287
हरिद्वार 336
नैनीताल 353
देहरादून 360
ऊधमसिंह नगर 422
(जुलाई, अगस्त व सितंबर के लिए)