ऊधमसिंहनगर जिला यूपी के साथ ही नेपाल से भी लगता है। कुमाऊं क्षेत्र के माओवादियों के साथ ही नेपाली माओवाद और चीनी भाषा के घुसपैठ का खतरा भी यहां रहता है। खुफिया विभाग को यहां विशेष सर्तकता बरतनी पड़ती है। दरअसल नेपाल का वर्तमान माओवादी नेतृत्व ब्रिटिश भारत और नेपाल के बीच मार्च 1816 में हुई सुगौली संधि को नहीं मानता है। ऐसे में हिमाचल, उत्तराखंड और दार्जिलिंग के कुछ क्षेत्रों को नेपाली माओवाद ग्रेटर नेपाल के रूप में परिभाषित करता है। चीन भी इस संबंध में नेपाल को अपना नैतिक समर्थन देता है।
यूएसनगर से सटे रामपुर तक लश्कर-ए- मोहम्मद दे चुका है दस्तक
ऊधमसिंह नगर से सटे रामपुर में कुछ समय पूर्व लश्कर-ए- मोहम्मद संगठन भी दस्तक दे चुका है। 2019 में रुड़की रेलवे स्टेशन के अधीक्षक को एक पत्र मिला था जिसमें हरिद्वार समेत दस रेलवे स्टेशनों को बम से उड़ाने की धमकी थी। इसमें रामपुर का रेलवे स्टेशन भी था। लश्कर-ए-मोहम्मद के एरिया कमांडर मैसूर अहमद का इस धमकी भरे पत्र में जिक्र किया गया था। रामपुर स्टेशन रुद्रपुर की सीमा में भी आता था। तब भी रुद्रपुर में तनाव का माहौल बना और पुलिस के साथ खुफिया तंत्र को सतर्क रहने के निर्देश मिले थे। जिससे धमकी देने वाला संगठन अपनी धमकी पर कोई काम नहीं कर सका।
आतंकी कनेक्शन को लेकर तीसरी बार सुर्खियों में आया पंतनगर
देश में आतंकी गतिविधियों में लिप्त लोगों की धरपकड़ में अब तक तीन बार पंतनगर कनेक्शन सामने आ चुका था। तीसरी बार शुक्रवार देर रात पठानकोट बम ब्लास्ट के आरोपियों को शरण देने के आरोप में पंतनगर चर्चा में है। पहली बार पंतनगर कनेक्शन तब सामने आया, जब वर्ष 2008 में रात दो बजे दो कंपनी पीएसी और यूपी पुलिस ने परिसर के फूलबाग सेंटर को छावनी में तब्दील कर दिया था। पुलिस के सर्च ऑपरेशन के दौरान पंतनगर विवि के जलखंड में पंप ऑपरेटर नफीस खान के लालबाग पंप स्थित झोपड़ी से कैमरी रामपुर (यूपी) निवासी एक लाख रुपये के इनामी आतंकी को गिरफ्तार किया गया था। शरण देने के आरोप में नफीस खान को भी धर लिया गया था। लगभग चार घंटे चली इस कार्रवाई की भनक तक परिसर वासियों को नहीं लगी। इसके बाद विवि प्रशासन ने नफीस की झोपड़ी तुड़वा दी थी।
इसके बाद जब वर्ष 2020 में बरेली से आतंकी इनामुल हक को गिरफ्तार किया गया था, तब फिर से पंतनगर चर्चा में आया। जांच में सामने आया था कि इनामुल हक पंतनगर के झा कालोनी में ही पैदा हुआ था और वर्ष 2015 में उसने झा कालोनी मंदिर में मूर्तियां खंडित कर परिसर को दंगे की आग में झोंक दिया था। इसके बाद उसके परिजनों ने उसे कहीं बाहर भेज दिया और वह बरेली से पकड़ा गया। अब तीसरी बार पंतनगर कनेक्शन फिर सामने आया है, जब शुक्रवार की देर रात एसटीएफ व पुलिस ने पठानकोट बम ब्लास्ट के आरोपियों को शरण देने के आरोप में चार लोगों को मय पिस्टल व कार के गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।