पिछले दिनों ऐसी घटनाएं सामने आई जिनसे राजधानी देहरादून में दो मासूमों की दुनिया उजड़ गई। सब कुछ होने के बाद भी अब उनके पास कुछ नहीं है।
देहरादून में शुक्रवार को इन दोनों घटनाओं के बारे में जिसने भी सुना उनका दिल पसीज गया। दून में क्लेमेंटटाउन निवासी मेजर पवन कुमार बोहरा और उनकी पत्नी रीना बोहरा की असम में एक सड़क हादसे में मौत हो गई। दुर्घटना में उनका 15 माह का बेटा अर्जुन बच गया।
शुक्रवार को जब मेजर और उनकी पत्नी का शव क्लेमेंटटाउन स्थित आवास पहुंचा तो परिवार सदमे में था। मासूम अर्जुन मम्मी-पापा के लिए दिनभर रोता रहा। कभी दादी तो कभी मासी के पास वह मम्मी-पापा से मिलने की जिद करता रहा।
इंजीनियरिंग सर्विस में तैनात 35 वर्षीय मेजर पवन कुछ समय पहले असम में तैनात हुए थे। उनकी पत्नी और बेटा साथ ही रहते थे। 20 जुलाई को पवन पत्नी और बेटे के साथ निजी कार से कहीं जा रहे थे। रास्ते में उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
गाड़ी लुढ़की तो रीना ने बेटे को गोद से उठाकर बाहर निकाल दिया और पति-पत्नी कार में फंसकर नीचे खाई में पहुंच गए। हादसे में दोनों की मौत हो गई, लेकिन नन्हा अर्जुन बच गया। अर्जुन की मौसी कृष्णा सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल हैं और असम में तैनात हैं। वही मेजर पवन और रीना का शव लेकर दून आई।
पवन की माता योगमाया बोहरा सदमे में हैं। उनके छोटे बेटे ने बड़े भाई-भाभी का अंतिम संस्कार किया। कृष्णा ने बताया कि परिवार के लिए यह बड़ा सदमा है। इससे उबर पाना आसान नहीं है। सबसे बड़ी चिंता अर्जुन की है। वह इतना छोटा है कि अपनी बात तक नहीं कह सकता। मासूम अर्जुन को हल्की चोटें आई हैं, लेकिन खतरे की कोई बात नहीं है।