पैसिफिक हिल्स अपार्टमेंट मामले में बिल्डर को क्लीन चिट देने के एक दिन बाद मुख्य नगर अधिकारी का जमीर जाग उठा।
हरक सिंह रावत एकदम बदले अंदाज में नजर आए
बुधवार को शायद किसी बड़े आदमी के दबाव के चलते बैकफुट अख्तियार करने वाले मुख्य नगर अधिकारी हरक सिंह रावत एकदम बदले अंदाज में नजर आए। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ ऐलान किया-नगर निगम की जमीन पर पैसिफिक हिल्स अपार्टमेंट पर कब्जा है।
इतना ही नहीं, शहरी विकास सचिव को पत्र भेज प्रशासन को भी कठघरे में खड़ा कर दिया। एक साल पूर्व एसडीएम की जांच पर भी सवाल उठाया। साफ किया कि उनकी जांच में पहले भी कब्जा मिला था और बुधवार को की गई पैमाइश में भी।
सफेदपोशों पर भी सवाल सूत्रों के मुताबिक बुधवार को एमएनए के प्रोजेक्ट को क्लीन चिट देने की वजह एक मंत्री की फटकार का नतीजा थी। बताया जा रहा है कि बुधवार को निगम की टीम के पैमाइश से लौटते ही इस मंत्री ने निगम अधिकारियों-कर्मचारियों के फोन घनघना दिए थे।
अफसरों को कड़ी फटकार लगाई थी। बताया जा रहा है कि इसके बाद ही दबाव में आए एमएनए ने मौके पर कब्जा न होने की बात कह दी थी। गुरुवार को नगर निगम में मंत्री का दबाव चर्चाओं में रहा।
उधर, गुरुवार दोपहर मेयर विनोद चमोली को इसकी जानकारी मिली तो वह उखड़ गए। उन्होंने कहा कि सरकार अपने कर्मचारियों से ही अवैध कार्य करवाएगी तो राज्य का कैसे भला होगा।
यह है एमएनए का पत्र
एक साल पूर्व पैसिफिक हिल्स ने नगर निगम की जमीन (खसरा नंबर 15) पर कब्जा किया था। उस वक्त 23 मई 2013 को निगम ने बिल्डर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मुकदमे के खिलाफ बिल्डर हाईकोर्ट गया।
हाईकोर्ट के आदेश पर तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने पैमाइश की और रिपोर्ट में कब्जा न होने की बात कही। एक साल बाद यह मामला फिर उठा तो 15 नवंबर को तहसील और निगम टीम के साथ मौके पर पैमाइश की गई। इसमें कब्जा मिला।
इसके बाद वह खुद डीएम से मिलने पहुंचे। वहां भी कब्जा होने की पुष्टि के बाद ही मीडिया को बयान दिए गए, लेकिन मुझ पर ही आरोप लगने लगा कि ‘मुख्य नगर अधिकारी बैकफुट पर आ गए हैं।’
एमएनए का खुलासा
- एसडीएम ने एक वर्ष पूर्व हाईकोर्ट के आदेश पर जो जांच की, उसकी रिपोर्ट नगर निगम को नहीं दी
- 18 नवंबर को पैमाइश के बाद भी एसडीएम एमएस बर्निया से पुरानी रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन दोबारा यह उपलब्ध नहीं कराई गई
- राजस्व निरीक्षक दयाराम ने डीएम चंद्रेश कुमार यादव के सामने माना कि निगम की सौ वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा है
(ये सब बातें एमएनए ने पत्र में लिखी हैं)
अवैध फ्लैट पर कब्जा लेगा निगम
पैसिफिक हिल अपार्टमेंट मामले में मेयर विनोद चमोली ने भी सख्त रवैया अख्तियार कर लिया है। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट में निगम की जमीन पर कब्जा कर सात फ्लैट बनाए गए हैं।
मेयर का कहना है कि इन फ्लैटों को तोड़ने के बजाय निगम इन पर कब्जा लेगा। इनका क्या करना है, यह बाद में बोर्ड बैठक में तय किया जाएगा।
1938 के दस्तावेजों पर हो जांच
मेयर ने डीएम चंद्रेश कुमार यादव को भेजे पत्र में 1938 के दस्तावेजों के आधार पर मामले की पूरी जांच के लिए लिखा है। मेयर का कहना है कि 1938 के दस्तावेजों के अनुसार ही मौके पर पैमाइश की जाएगी। बाद के नक्शों, दस्तावेजों में छेड़छाड़ की आशंका जताई।
पैसिफिक हिल्स में निगम की ‘नो एंट्री’
पैसिफिक हिल अपार्टमेंट में निगम की जमीन पर दीवार बनाने पहुंची टीम को फजीहत झेलनी पड़ी। टीम के आने की जानकारी पर प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों ने गेट पर ताला लगा दिया।
दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक भी हुई। निगम का कहना है शुक्रवार को पुलिस बल की मौजूदगी में दीवार बनेगी। बता दें कि मंगलवार को पैमाइश के बाद एमएनए ने कब्जाई गई निगम की भूमि पर दीवार बनाने का आदेश दिया था। इसके लिए मेयर ने साढ़े तीन लाख रुपये स्वीकृत भी कर दिए हैं।
एक ओर सरकार अवैध कब्जाधारियों पर नकेल कसने की बात कर रही है। दूसरी ओर जो अधिकारी और कर्मचारी ईमानदारी से काम कर रहे हैं, उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। सरकार को दो तरह की बात नहीं करनी चाहिए। यह ठीक नहीं। पैसिफिक हिल्स मामले की पूरी जांच की जाएगी। वहां निगम की जमीन पर कब्जा हुआ है।
- विनोद चमोली, मेयर
नगर निगम जहां कब्जे की बात कर रहा है, वहां पिछले साल ही निगम कर्मचारियों ने राजस्व विभाग संग पैमाइश की थी। कंपनी को क्लीन चिट दी गई थी। लेकिन अब फिर कंपनी की छवि धूमिल की जा रही है। नगर निगम का हाल यह है कि वह हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद डेढ़ साल से शपथपत्र दाखिल नहीं कर सका है। निगम ने हाल में जो पैमाइश की, उसमें कंपनी का कोई प्रतिनिधि नहीं था। एकतरफा कार्रवाई की जा रही है।
- अभिषेक बंसल, निदेशक, पैसिफिक हिल्स डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड