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उत्तराखंड: किसानों के लिए खुशखबरी, प्रदेश में जल्द आर्गेनिक एक्ट लागू करने की तैयारी

Tue, 01 May 2018 01:40 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में आर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने और किसानों को जैविक उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार शीघ्र ही उत्तराखंड आर्गेनिक एक्ट लागू करने जा रही है। इसके लिए एक्ट का प्रारूप लगभग तैयार हो गया है। विधि विभाग की कानूनी राय लेकर जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

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इस एक्ट के लागू होने के बाद  किसानों के जैविक उत्पाद को प्रमाणीकरण प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। सरकार का मानना है कि प्रमाणीकरण से राज्य के आर्गेनिक उत्पाद को ब्रांड के रूप में  पहचान दिलाई जा सकेगी। साथ ही आर्गेनिक उत्पादों को उत्पादित करने वाले प्रतिबंधित क्षेत्र में रसायन युक्त पेस्टीसाइड बेचने पर एक लाख तक जुर्माना व एक साल की सजा भी हो सकती है।

सरकार ने एक्ट के प्रारुप में जैविक उत्पादों की मार्केटिंग का विशेष प्रावधान किया है। किसानों से जैविक उत्पाद खरीदने वाली कंपनियों, व्यापारियों, एनजीओ को उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद में पंजीकरण करना अनिवार्य होगा।
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उत्तराखंड राज्य जैविक प्रमाणीकरण एजेंसी के माध्यम से जैविक खेती करने वाले किसानों के उत्पाद को प्रमाणीकरण कर प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। वहीं राज्य में उत्पाद विशेष आर्गेनिक उत्पादों को ब्रांड के रूप में मार्केटिंग की जाएगी। इसके तहत हर्षिल का राजमा, पुरोला का लाल चावल, देहरादून का बासमती, ज्योलीकोट का शहद आदि तमाम उत्पादों प्रमाणीकरण किया जाएगा।  


 

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80 हजार किसान कर रहे जैविक खेती

प्रदेश के 10 ब्लाक जैविक घोषित
केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत आर्गेनिक खेती के लिए अभी तक प्रदेश के 10 विकासखंड को जैविक घोषित किया गया। जिसमें रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ, अगस्त्यमुनि, जखोली, अल्मोड़ा का सल्ट, चमोली का देवाल, पिथौरागढ़ का मुनस्यारी, नैनीताल का बेतालघाट, पौड़ी में जहरीखाल, टिहरी में प्रतापनगर, उत्तरकाशी में डुंडा विकास खंड में किसी प्रकार का रसायनिक पेस्टीसाइड बेचने पर प्रतिबंध है।

80 हजार किसान कर रहे जैविक खेती
उत्तराखंड में परपंरागत कृषि विकास योजना के तहत प्रदेश में 500 कलस्टरों में करीब 80 हजार किसान आर्गेनिक खेती से जुड़े हैं। नैनीताल, पौड़ी, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली जिला के अलावा जैविक उत्पादन परिषद के कलस्टरों में जैविक खेती की जा रही है। जिसमें मंडुवा, गहत, बासमती चावल, मक्की, चौलाई, सोयाबीन, काला भट्ट, रामदाना, राजमा, गेहूं, मसूर, सरसों के अलावा सब्जी व मसालों का उत्पादन शामिल है। प्रदेश में 176279 क्विंटल जैविक कृषि उत्पादों का उत्पादन हो रहा है। जिसकी मार्केट वैल्यू करीब 4254 लाख रुपये हैं।

राज्य को आर्गेनिक स्टेट बनाने की दिशा में सरकार काम कर रही है। जल्द ही प्रदेश में आर्गेनिक एक्ट को लागू किया जाएगा। इस एक्ट से किसानों के उत्पादों प्रमाणीकरण कर पहचान मिलेगी। साथ ही आर्गेनिक खेती के लिए चयनित क्षेत्रों में पेस्टीसाइड की बिक्री प्रतिबंध होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना व सजा का प्रावधान किया गया है।
-सुबोध उनियाल, कृषि एवं उद्यान मंत्री
 
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