प्रदेश के 10 ब्लाक जैविक घोषित
केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत आर्गेनिक खेती के लिए अभी तक प्रदेश के 10 विकासखंड को जैविक घोषित किया गया। जिसमें रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ, अगस्त्यमुनि, जखोली, अल्मोड़ा का सल्ट, चमोली का देवाल, पिथौरागढ़ का मुनस्यारी, नैनीताल का बेतालघाट, पौड़ी में जहरीखाल, टिहरी में प्रतापनगर, उत्तरकाशी में डुंडा विकास खंड में किसी प्रकार का रसायनिक पेस्टीसाइड बेचने पर प्रतिबंध है।
80 हजार किसान कर रहे जैविक खेती
उत्तराखंड में परपंरागत कृषि विकास योजना के तहत प्रदेश में 500 कलस्टरों में करीब 80 हजार किसान आर्गेनिक खेती से जुड़े हैं। नैनीताल, पौड़ी, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली जिला के अलावा जैविक उत्पादन परिषद के कलस्टरों में जैविक खेती की जा रही है। जिसमें मंडुवा, गहत, बासमती चावल, मक्की, चौलाई, सोयाबीन, काला भट्ट, रामदाना, राजमा, गेहूं, मसूर, सरसों के अलावा सब्जी व मसालों का उत्पादन शामिल है। प्रदेश में 176279 क्विंटल जैविक कृषि उत्पादों का उत्पादन हो रहा है। जिसकी मार्केट वैल्यू करीब 4254 लाख रुपये हैं।
राज्य को आर्गेनिक स्टेट बनाने की दिशा में सरकार काम कर रही है। जल्द ही प्रदेश में आर्गेनिक एक्ट को लागू किया जाएगा। इस एक्ट से किसानों के उत्पादों प्रमाणीकरण कर पहचान मिलेगी। साथ ही आर्गेनिक खेती के लिए चयनित क्षेत्रों में पेस्टीसाइड की बिक्री प्रतिबंध होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना व सजा का प्रावधान किया गया है।
-सुबोध उनियाल, कृषि एवं उद्यान मंत्री