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प्रदेश में नहीं भू-माफिया, घोषित करने का कोई तंत्र नहीं

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उत्तराखंड में सरकारी और निजी संपत्तियों पर कब्जे आम हैं, मगर हैरत की बात है कि यहां कोई भूमाफिया नहीं है। जी हां यही सच है। कहने को तो हजारों भूमाफिया होंगे, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में किसी का नाम दर्ज नहीं होता। कारण, उत्तराखंड में ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं है। अब बढ़ते मामलों को देखते हुए यहां भी उत्तर प्रदेश की तरह भूमाफिया पर अंकुश लगाने के लिए एक विशेष तंत्र की जरूरत महसूस होने लगी है। पुलिस के स्तर पर तो डीजीपी ने जिला पुलिस को ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।
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बीते दिनों एसटीएफ ने यशपाल तोमर नाम के गैंगस्टर को गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज थे। जांच में पता चला कि उसने अवैध रूप से करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है। उसकी 153 करोड़ की संपत्ति को कुर्क भी किया गया था। उत्तराखंड एसटीएफ की कार्रवाई के बाद मेरठ जिला प्रशासन ने यशपाल को अपने यहां का भूमाफिया घोषित कर उसका नाम पोर्टल पर अपलोड किया था। उसकी सैकड़ों करोड़ की संपत्ति को सरकार के कब्जे में ले लिया गया था। वर्तमान में उसे राज्य स्तर का भूमाफिया घोषित करने की तैयारी चल रही है। वहीं, तोमर के खिलाफ उत्तराखंड में ऐसी कार्रवाई नहीं हो पाई। ऐसे में राज्य सरकार ने अब एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स गठित करने की पहल शुरू की है।
राज्य स्तर पर मुख्य सचिव होते हैं अध्यक्ष
उत्तर प्रदेश में चार स्तर पर टास्क फोर्स बनाई गई है। राज्य स्तर की टास्क फोर्स में मुख्य सचिव अध्यक्ष होते हैं। प्रमुख सचिव न्याय, गृह, नगर विकास, वन, आवास एवं शहरी नियोजन, सिंचाई और पुलिस महानिदेशक सदस्य होते हैं। इसी तरह मंडल स्तर पर मंडलायुक्त अध्यक्ष, जिला स्तर पर जिलाधिकारी और तहसील स्तर पर एसडीएम टास्क फोर्स के अध्यक्ष होते हैं। अलग-अलग स्तर पर टास्क फोर्स की सिफारिश के बाद ही कार्रवाई होती है।
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पुलिस को निर्देशित किया गया है कि अपने-अपने क्षेत्रों में इस तरह के लोगों की गतिविधियों पर नजर रखें। कोई शिकायत आए तो उनके खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए ताकि लोगों को त्वरित न्याय मिल सके।
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-अशोक कुमार, डीजीपी उत्तराखंड
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