ग्रामीणों के विरोध के चलते पतंजलि फूड पार्क के करीब पांच हजार कर्मचारी फैक्ट्री के अंदर नहीं जा पाए। सुबह छह बजे की शिफ्ट में कुछ कर्मी अंदर गए भी लेकिन उसके बाद किसी शिफ्ट में कोई कर्मी अंदर नहीं घुस पाया। कर्मचारियों की बसें दिनभर रास्ते में खड़ी रही।
दोपहर में ग्रामीण व कर्मचारियों के आमने-सामने आने की नौबत भी बनी लेकिन पुलिस ने स्थिति पर काबू पा लिया।
हिंसक झड़प में हुई थी मौत
बुधवार को बाबा रामदेव के पदार्था स्थित पतंजलि फूड पार्क के सुरक्षाकर्मियों और ट्रक यूनियन के पदाधिकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प में ट्रक कारोबारी दलजीत सिंह की मौत हो गई थी।
दोपहर बाद प्रबंधन ने फैक्ट्री का काम बंद कर कर्मियों को छुट्टी दे दी थी। बृहस्पतिवार को सभी कर्मियों को नियत समय पर काम पर लौटने को कहा था।
गिरफ्तारी न होने तक बंद रहेगी फैक्ट्री
सुबह छह बजे की शिफ्ट में कुछ कर्मचारी अंदर पहुंच गए थे लेकिन उसके बाद दस बजे की शिफ्ट में अंदर जा रहे कर्मियों को स्थानीय लोगों ने यह कहकर रोक दिया कि जब तक पुलिस सभी हत्यारोपियों को गिरफ्तार नहीं कर लेती तब तक फैक्ट्री नहीं चलेगी।
फैक्ट्री से दूर खड़ी रहीं कर्मचारियों की बसें
ग्रामीणों के विरोध के चलते पुलिस ने कर्मचारियों को अंदर नहीं जाने दिया। हरिद्वार से कर्मियों को लेकर जा रही कई बसें निर्मल फार्म के पास आम के बाग में आकर रुक गईं। कर्मचारी यहीं पेड़ों की छांव में बैठ गए। दोपहर दो बजे फिर बसें फैक्ट्री की ओर रवाना हुई।
बसें आती देख फैक्ट्री के सामने एक मकान की छत से कुछ लोगों ने पत्थर उठा लिए। पुलिस ने तुरंत छत से लोगों को भगाया और कर्मचारियों की बसों को अंदर नहीं जाने दिया।