नए कानूनों में ई-एफआर की सुविधा दी गई है। पीड़ित अब कहीं से भी अपने मुकदमों को दर्ज करा सकता है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार हमारे कानून आतंकवाद, संगठित अपराधों और आर्थिक अपराधों को पूरी तरह परिभाषित करेंगे। नए कानूनों में मॉब लिंचिंग को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, भगोड़ों की गैरमौजूदगी में भी मुकदमा चलाने के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। उत्तराखंड में इनके क्रियान्वयन के लिए पुलिस को 20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इनसे विभिन्न उपकरणों की खरीद और सुविधाएं जुटाई जाएंगी। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि पूरे देश ऐतिहासिक निर्णय का क्रियान्वयन हो रहा है। अंग्रेजी शासनकाल से लेकर आज तक पुराने कानून चले आ रहे थे, जिनसे अब देश को मुक्ति मिल गई है। इनसे तकनीकी का प्रयोग कर त्वरित न्याय दिलाया जा सकेगा। डीजीपी अभिनव कुमार ने कहा कि आजादी के बाद यह हमारी न्याय व्यवस्था का सबसे बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन है। दिसंबर 2023 में हमारी संसद में ये तीनों कानून पास किए गए थे। एक जनवरी को इन्हें एक जुलाई से लागू करने का फैसला लिया गया था। इसके लिए उत्तराखंड पुलिस ने विभिन्न स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी थी। करीब 24 हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है।
सीसीटीएनएस में जोड़े गए 23 पेज
नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन के लिए सीसीटीएनएस और एससीआरबी टीम ने एनसीआरबी से आए 23 नए पेजों को सॉफ्टवेयर में जोड़ा है। ये विवेचना अधिकारियों को तकनीकी का प्रयोग करते हुए निष्पक्षता से जांच करने में सहायक होंगे। कार्यक्रम में जिलों के अधिवक्ताओं, पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों ने भी तीन नए कानूनों पर विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर सचिव शैलेश बगौली, गृह सचिव दिलीप जावलकर, एडीजी अभियोजन पीवीके प्रसाद, एडीजी सीबीसीआईडी वी मुरुगेशन, एडीजी कानून व्यवस्था एपी अंशुमान आदि अधिकारी मौजूद रहे।