इंस्पेक्टर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट प्रदीप पंत ने उसके रुकने की व्यवस्था घंटाघर के पास एक रैन बसेरे में कराई थी। युवक की इस कहानी पर अमर उजाला ने ‘छल से मिला नाम लेकर राजधानी में अपनी पहचान खोज रहा राजू’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस खबर को ब्राह्मणवाला पटेलनगर के रहने वाले कपिल देव शर्मा के परिवार ने भी पढ़ा। उन्हें समझते देर न लगी कि वह उनका बेटा हो सकता है। कपिल देव शर्मा की पत्नी आशा शर्मा बेटे की तलाश में पहले रैन बसेरा गईं और फिर वहां से एएचटीयू का पता मिला।
यहां उन्होंने कुछ पुरानी तस्वीरें दिखाईं और उस वक्त की कहानियों को पुलिस को सुनाया। उन्होंने पुलिस को बताया कि युवक का नाम मोनू शर्मा है। वह वर्ष 2008 में एक दिन अचानक लापता हो गया था। इसके बाद उसकी कई राज्यों में तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल पाई थी। सारी बातों की तस्दीक करने के बाद पुलिस ने मोनू को उसकी मां को सौंप दिया। अपने कलेजे के टुकड़े को गले लगाकर महिला भावुक हो गई।
एक बहन है, मौसी की बेटियों को समझता था सगी बहनें
कपिल देव शर्मा किराना सामान की पैकिंग का काम करते हैं। युवक ने बताया था कि उसकी चार बहनें हैं, लेकिन मोनू की मां ने बताया कि उसकी सगी बहन एक ही है। उस वक्त उनकी बहन की बेटियां यहां रहती थीं, इसी कारण सभी को मिलाकर वह चार बहनें बता रहा था। मोनू शर्मा की मां आशा शर्मा ने अमर उजाला का आभार व्यक्त किया है।
मोनू को कैद की जिंदगी से निकालने वाला गुमनाम
मोनू को कैद की जिंदगी से निकालने वाला ट्रक चालक अगर हिम्मत न करता तो ब्राह्मणवाला के शर्मा परिवार की खुशियां वापस न होतीं। ट्रक चालक ने सारी कहानी पर्चे पर लिख दी, लेकिन अपना नाम नहीं लिखा। ऐसे में इस गुमनाम ट्रक चालक का भी परिवार ने आभार व्यक्त किया। मोनू शर्मा अपने परिवार का नाम, पता, सब भूल चुका था। ऐसे में इस ट्रक चालक की चिट्ठी ने ही उसकी अंधेरी राह में रोशनी दिखाने का काम किया।