कभी धीरूभाई अंबानी एक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल भरने का काम करते थे और बाद में अपने करिश्माई व्यक्तित्व की बदौलत रिलायंस जैसी कंपनी बना डाली।
पर्सनैलिटी ट्रेट मैनेजमेंट गुरु मोदी
इसी तरह का पर्सनैलिटी ट्रेट मैनेजमेंट गुरु बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी में देख रहे हैं, जो एक चाय वाले से ऊपर उठकर अब बीजेपी जैसी पार्टी को अपने पीछे धकेल रहे हैं।
उनकी मानें तो कोई भी आर्गेनाइजेशन या पार्टी लीडर की पर्सनैलिटी के बूते ही आगे बढ़ती है। इसे देखते हुए मोदी राइट ट्रैक पर है।
उन्हें नहीं लगता कि मोदी के आगे पार्टी गौण हो गई है। बल्कि उनके मुताबिक पार्टी को इससे फायदा होगा। ठीक उस तरह जैसे रिलायंस को हुआ।
अंबानी, मोदी स्टाइल में यह ट्रेट समान
डायनामिक : डायनामिज्म ऐसा गुण है, जो मोदी और अंबानी दोनों को एक प्लेटफार्म पर रखता है।
भले ही लोग छवि निर्माण के पीछे मार्केटिंग को वजह मानें। लेकिन यह भी सच है किमोदी इस वक्त चुनाव की डगर पर चल रहे अन्य नेताओं के व्यक्तित्व से हटकर छवि निर्माण में कामयाब हैं।
क्लैरिटी आफ विजन : मैनेजमेंट गुरु एक और गुण मोदी और अंबानी में एक जैसा देखते हैं, वह है क्लैरिटी आफ विजन।
उन्हें पता है कि लक्ष्य क्या है, उसी के मुताबिक चाल, चरित्र निर्धारण उन्होंने कर लिया है। वह लक्ष्य से भ्रमित दिखाई नहीं देते। इसीलिए 60 महीने की बात करते हैं।
इंपैथी : इसका मतलब किसी परिस्थिति को भांपकर उसके लिहाज से कदम उठाना। मोदी को मालूम है कि रोजगार, विकास के मुद्दों को भुनाया जा सकता है, लिहाजा वह गुजरात के माडल की बात दोहराते हैं।
सपने दिखाते हैं और बेचते हैं। धीरू भाई अंबानी ने भी इसी तरह सपने बेचे हैं।
‘मोदी के पर्सनैलिटी ट्रेट्स उनके साथ ही उनकी पार्टी को भी सपोर्ट करने वाले हैं। इस वक्त मैनेजमेंट में उनकी केस स्टडीज इन्हीं गुणों के आधार पर पढ़ाई जा रही है।’
- स्वाति बिष्ट, इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट स्टडीज (आईएमएस)