बर्खास्तगी आदेश में किस आधार पर
बर्खास्तगी आदेश में उन्हें किस आधार पर, किस कारण हटाया गया कहीं इसका उल्लेख नहीं किया गया और ना ही उन्हें सुना गया, जबकि उनके द्वारा सचिवालय में नियमित कर्मचारियों की भांति कार्य किया गया है। एक साथ इतने कर्मचारियों को बर्खास्त करना लोकहित में नहीं है। यह आदेश विधि विरुद्ध है।
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विधानसभा सचिवालय में 396 पदों पर बैक डोर नियुक्तियां 2001 से 2015 के बीच हुई है जिनको नियमित किया जा चुका है। याचिकाओं में कहा गया था कि 2014 तक तदर्थ नियुक्त कर्मचारियों को चार वर्ष से कम की सेवा में नियमित नियुक्ति दे दी गई लेकिन उन्हें छह वर्ष के बाद भी नियमित नहीं किया और अब उन्हें हटा दिया गया। उनकी नियुक्ति को 2018 में जनहित याचिका दायर कर चुनौती दी गई थी जिसमें कोर्ट ने उनके हित में आदेश दिया था जबकि नियमानुसार छह माह की सेवा के बाद उन्हें नियमित किया जाना था।