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नैनीताल हाईकोर्ट का फैसला: भिखारियों और उनके साथ रहने वाले बच्चों का कराएं DNA टेस्ट

Fri, 08 Dec 2017 10:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल
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हाईकोर्ट - फोटो : file photo
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उच्च न्यायालय ने मानव तस्करी के मामले में सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार को भीख मांगने पर रोक लगाने और इसके लिए उत्तर प्रदेश की तर्ज पर कानून बनाने, भिखारियों और उनके साथ रहने वाले बच्चों का डीएनए टेस्ट कराने, लापता बच्चों का पता लगाने के लिए चार हफ्ते के अंदर विशेष जांच दल गठित करने समेत कई निर्देश दिए हैं।
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इसके अलावा केंद्र सरकार को मानव तथा नशीली दवा की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए यूएनओ की ओर से बनाये गए आदर्श कानून देश के लिए भी बनाने की संस्तुति की है। साथ ही कोर्ट ने स्पेशल सेशन जज चंपावत की ओर से चार मई 2016 को पारित आदेश के खिलाफ सरकार की अपील को स्वीकार कर लिया है। सेशन जज ने अपने आदेश में मानव तस्करी के आरोपी को दोषमुक्त करार दिया था। हाइकोर्ट में इस मामले में सुनवाई अब 12 दिसंबर को होगी।

वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह प्रदेश में भीख मांगने पर प्रतिबंध लगाए तथा उत्तर प्रदेश की तर्ज पर इसके लिए कानून बनाये।
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न्यायालय ने केंद्र सरकार से मानव तथा नशीली दवा की तस्करी पर लगाम लगाने को यूएनओ द्वारा बनाये गए आदर्श कानून देश के लिए भी बनाये जाने की संस्तुति की। इसके साथ ही नेपाल से आने वाले विशेषकर अवयस्क बच्चों और युवतियों की पूरी छानबीन करने व उनके अभिभावकों की पहचान निर्धारित करने, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर विशेष चौकसी बरतने के निर्देश दिए।
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न्यायालय ने कहा कि अधिकतर मामलों में भीख मंगवाने के ल‌िए बच्चों का अपहरण

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न्यायालय ने लापता बच्चों का पता लगाने को चार सप्ताह के अंदर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की अगुवाई में विशेष जांच दल का गठन करने, गुमशुदगी के मामले में तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर समयबद्ध बरामदगी सुनिश्चित करने, मानव तस्करी में लिप्त अपराधियों पर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत कार्यवाही करने व उनकी संपत्ति जब्त करने, लापता बच्चों का फोटो बैंक बना कर वेबसाइट सहित प्रमुख सार्वजनिक स्थानों, रेलवे स्टेशन आदि पर प्रदर्शित करने, बरामद बच्चों को परामर्श की सुविधा देने, उन्हें सुरक्षित आवास, भोजन व सुरक्षा दिलवाने के भी निर्देश दिए।

न्यायालय ने कहा कि अधिकतर मामलों में बच्चों का अपहरण भीख मंगवाने के लिए किया जाता है। भिखारियों और उनके साथ रहने वाले बच्चों का डीएनए टेस्ट कर उनकी पहचान सुनिश्चित करें और अन्यथा होने पर उन्हें रेस्क्यू किया जाए। कोर्ट ने समाचार पत्रों व चैनलों को सामाजिक जिम्मेदारी के तहत गुमशुदा बच्चों संबंधी सूचना कम शुल्क पर प्रकाशित व प्रसारित करने की हिदायत भी दी।

न्यायालय ने गुमशुदा व मानव तस्करी के शिकार बच्चों की बरामदगी को लेकर पुलिस व संबंधित एजेंसियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करने को भी कहा। कोर्ट ने कहा कि मानव तस्करी निरोधक इकाई में पुलिस उपाधीक्षक / सीओ रैंक से नीचे का अधिकारी नहीं होना चाहिए। इसके अलावा एक पुलिस निरीक्षक, दो पुलिस उपनिरीक्षक, तीन सहायक पुलिस निरीक्षक, 10 से 15 सिपाही और 50 फीसदी महिला अधिकारी होने चाहिए।
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